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Pratapgarh News: गुर्दा रोगियों की बढ़ी परेशानी, डायलिसिस के लिए तीन महीने बाद आ रही बारी

Fri, 08 Sep 2023 09:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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प्रताप बहादुर चिकित्सालय में डायलेसिस कराते मरीज। संवाद
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मरीज के साथ तीमारदार भी परेशान, निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस कराने के लिए कई महीने की वेटिंग चल रही है। तीन से चार महीने इंतजार करने के बाद मरीजों का नंबर लग रहा है। ये हाल तब है जब डायलिसिस की 12 यूनिट चल रही हैं। दो पालियों में 36 मरीजों की डायलिसिस की जा रही हैं। तीन से चार महीने तक नंबर न आने से मरीज ही नहीं उनके तीमारदार भी परेशान हो रहे हैं। गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल में जाकर मजबूरी में जाना पड़ रहा है।
12 मशीनों की मदद से 36 मरीजों की प्रतिदिन डायलिसिस की जा रही है। इनमें से कई मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें महीने में चार बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इनमें कई ऐसे भी मरीज होते हैं जिन्हें दो बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इस तारतम्य को बनाए रखने के चक्कर में नए मरीजों का नंबर लगने में देरी हो रही और प्रतीक्षा सूची बढ़ती चली जा रही है।
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नेफ्रोलॉजिस्ट को दिखाने मरीजों को जाना पड़ता है प्रयागराज
मेडिकल कॉलेज में नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में गुर्दा रोग से पीड़ित मरीजों को इलाज कराने पहले प्रयागराज या फिर लखनऊ जाना पड़ता है। यहां डॉक्टर यदि डायलिसिस कराने की सलाह देते हैं तो उन्हें फिर लौटकर मेडिकल कॉलेज के राज प्रताप बहादुर चिकित्सालय आना पड़ता है। उनका नाम और मोबाइल नंबर कंप्यूटर में दर्ज कर लौटा दिया जाता है। यह भी कहा जाता है कि जिस दिन समय मिलेगा डायलिसिस के लिए बुलाया जाएगा।

निजी अस्पतालों में महंगा है डायलिसिस कराना
निजी अस्पतालों में डायलिसिस कराना महंगा है। अलग-अलग निजी अस्पतालों के अलग-अलग शुल्क हैं। एक बार डायलिसिस के लिए मरीजों को आठ से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कहीं-कहीं तीन से पांच हजार रुपये तक के खर्च पर डायलिसिस की जाती है। इस वजह से आर्थिक रूप से कमजोर मरीज निजी अस्पतालों में डायलिसिस नहीं करा पाते हैं। मेडिकल कॉलेज में एक रुपये की पर्ची पर डायलिसिस हो जाती है।
मरीजों की जुबानी ...
मेरा इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा था। अब तक वहीं पर डायलिसिस हो रही थी। डॉक्टर ने घर भेजते समय यह कहकर डिस्चार्ज किया था कि सप्ताह में दो बार डायलिसिस की जरूरत है। यहां वेटिंग के कारण डायलिसिस नहीं करा पा रहा हूं।
- संतोष तिवारी, खूझीं

डायलिसिस कराना भारी पड़ रहा है। 18 साल की आयु में गुर्दा रोगी बन गया। सरकारी अस्पताल की वेटिंग लिस्ट में नाम है। निजी अस्पतालों में आठ से दस हजार रुपये खर्च आ रहा है। परेशान घूम रहा हूं, सुनवाई नहीं हो रही है।
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रवि कुमार, विश्वनाथगंज
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दिन प्रतिदिन गुर्दा रोग पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। गंभीर मरीजों की प्राथमिकता के आधार पर डायलिसिस हो रही है। जो मरीज गंभीर नहीं हैं, उन्हें कुछ दिनों बाद डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य
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