बेल्हा में भी तीन तलाक से कई महिलाओं की जिंदगियां बर्बाद हुई हैं। इंसाफ के लिए वे सालों से समाज से लेकर न्याय के दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं। शौहर के जुल्म की सजा बीवी को ठोकरें खाकर मिल रही हैं, जबकि ऐसे शौहर दूसरी शादियां कर अपना घर बसा चुके हैं।
तीन तलाक के चलते मौजूदा समय में कई परिवार दुखी हैं। ऐसी बेटियोें के बोझ तले उनके माता-पिता पिस रहे हैं। कभी खुशी-खुशी बेटी का निकाह करने वाले वालिदैन अब उसके शौहर के तीन तलाक के कदम से लाचारगी महसूस कर रहे हैं। अधिवक्ता मोहम्मद खलील की मानें तो कंधई थाना क्षेत्र की रहने वाली निकहत की शादी बरसंडा के रहने वाले मीरान से चार साल पहले हुई थी। कुछ दिनों बाद मीरान का जी भर गया तो उसने निकहत को तीन तलाक दे दिया। जिसके बाद उसकी जिंदगी में भूचाल आ गया। वह इंसाफ के लिए न्यायालय की शरण में है। नगर कोतवाली के जोगापुर की रहने वाली शबनम का निकाह फूलपुर के रहने वाले यूसुफ के साथ हुआ था। शादी के साल भर बाद उसके जीवन में जहर घुल गया। शौहर ने उसे तीन तलाक दे दिया। ऐसा ही हाल शमशेरगंज की रहने वाली रुबीना का है। उसकी शादी रायबरेली के रहने वाले इकबाल के साथ हुई थी। शौहर के तीन तलाक देने से उसकी भी जिंदगी बर्बाद हो चुकी है। न्यायालय से उसे तीन लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश भी हो चुका है। इसी तरह कुसफरा की रहने वाली राजिदा के शौहर रशीद निवासी जेठवारा, बरसंडा की कैसरजहां, बिहारगंज की तबस्सुम ,बेवली की हसरातुल, कुसफरा की आफरीन, पट्टी की हसीना और यहीं की फात्मा की शौहरों के कारण जिंदगी बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है। अधिवक्ता खलील की मानें तो अकेले उनके पास ही करीब 5 सौ मुस्लिम महिलाओं के गुजर बसर से लेकर तीन तलाक के मामले हैं। जो महिला प्रकोष्ठ से लेकर, मध्यस्थता केंद्र से लेकर न्यायालय में विचाराधीन हैं।