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Pratapgarh : बंद पड़े डिग्री कॉलेज में पकड़ी गई पटाखे की अवैध फैक्टरी, 14 कमरो में भरे थे पटाखे

Mon, 06 Oct 2025 02:34 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़

सार

पट्टी इलाके के सपहा छात स्थित सुखराज सिंह बालिका महाविद्यालय में अवैध पटाखा फैक्टरी पकड़ी गई है। महाविद्यालय का संचालन आद्या प्रसाद सिंह द्वारा किया जा रहा है। विगत तीन वर्षों से महाविद्यालय बंद चल रहा है।
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प्रतापगढ़ में बंद पड़े डिग्री कॉलेज में चल रही थी पटाखा फैक्टरी। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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पट्टी इलाके के सपहा छात गांव स्थित सुखराज सिंह बालिका महाविद्यालय में अवैध पटाखा फैक्ट्री पकड़ी गई है। महाविद्यालय का संचालन आद्या प्रसाद सिंह द्वारा किया जाता रहा है। बीते 3 वर्षों से महाविद्यालय बंद चल रहा है। इस महाविद्यालय के लगभग 14 कमरों में अवैध रूप से पटाखा बनाया जा रहा था। पुलिस ने अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालन की आरोपी मदीना को हिरासत में लिया है। पुलिस की पूछताछ के दौरान विद्यालय के प्रबंधक ने बताया कि उन्होंने पट्टी कस्बे की मदीना को किराए पर एक कमरा दिया था।

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पुलिस छापामारी के दौरान महाविद्यालय के कुछ कमरों को छोड़कर बाकी सारे कमरों में पटाखा बनाने का कार्य किया जा रहा था। जिसमें इस परिवार की पांच महिलाएं व दो पुरुष शामिल हैं। इसकी गुप्त जानकारी पुलिस को हुई तो सोमवार दोपहर सीओ मनोज कुमार सिंह रघुवंशी, एसडीएम पूर्णेन्दु मिश्रा, कोतवाल अभिषेक सिरोही व आसपुर देवसरा थानाध्यक्ष विजेंद्र सिंह मयफोर्स विद्यालय में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान करोड़ों का अवैध पटाखा बरामद करने का दावा किया जा रहा है। लगभग

14 कमरों में यह फैक्ट्री चलती हुई पाई गई है। इन कमरों में निर्मित अर्ध निर्मित पटाखा बनाने की सामग्री मौजूद थी। खुले में बारूद भी रखा हुआ मिला। जो सुरक्षा इंतजाम की पोल खोल रहा था। सीओ मनोज कुमार सिंह रघुवंशी ने कहा कि अभी सामग्री एकत्रित की जा रही है। इसकी अनुमानित लागत के साथ की जाने वाली विधि कार्यवाही की जानकारी शाम तक उपलब्ध कराई जाएगी।
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बंद डिग्री कॉलेज में पकड़ी गई पटाखे की अवैध फैक्टरी। - फोटो : संवाद।
आसपुर देवसरा थानाध्यक्ष की इनपुट पर पहुंची पुलिस

आसपुर देवसरा। आसपुर देवसरा थानाध्यक्ष विजेंद्र सिंह को विगत कई दिनों से अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालक किए जाने की लगातार जानकारी मिल रही थी।  उनके बॉर्डर पर स्थित सुखराज सिंह बालिका महाविद्यालय में अवैध रूप से अब पटाखा बनाया जा रहा है। जिसकी जानकारी उन्होंने उच्च अधिकारियों को दी। उनकी ही सूचना पर सोमवार दोपहर में पुलिस ने एसडीएम की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ छापामारी की तो भारी मात्रा में अवैध पटाखे व भारी मात्रा में बारूद बरामद हुए हैं।

प्रतापगढ़ में बंद पड़े डिग्री कॉलेज में पकड़ी गई अवैध पटाखा फैक्टरी। - फोटो : संवाद।
25 पाउंड बारूद का है लाइसेंस

महाविद्यालय में मौजूद महिला मदीना बेगम ने बताया कि उनके पास पटाखा बनाने का लाइसेंस है। जबकि वह लाइसेंस 25 पाउंड यानी लगभग 12 किलो वजन  का होता है। पुलिस को जो लाइसेंस दिखाया गया उसके अनुसार 12 किलो बारूद ही वह भी आबादी से दूर गोदाम में रखा जाना चाहिए। जबकि महाविद्यालय परिसर पट्टी आसपुर देवसरा मार्ग से लगभग चांद मीटर की दूरी पर है। जबकि पुलिस को मौके पर करीब एक कुंतल बारूद के आसपास पाया गया है। इस संबंध में एसडीएम पट्टी पूर्णेन्दु मिश्रा ने बताया कि करीब दो वर्ष से इस महिला के लाइसेंस का रिनुअल भी नहीं हुआ है। लिहाजा यह पटाखा बनाने का कार्य जो महाविद्यालय के भवन में किया जा रहा था वह पूर्णता अवैध है।

प्रतापगढ़ में बंद पड़े डिग्री कॉलेज में पकड़ी गई अवैध पटाखा फैक्टरी। - फोटो : संवाद।
अवैध पटाखा फैक्ट्री एवं निर्माण की प्रबंधक को नहीं थी जानकारी

सुखराज सिंह बालिका महाविद्यालय के प्रबंधक आद्या प्रसाद सिंह ने बताया कि उनके महाविद्यालय की संबद्धता विश्वविद्यालय द्वारा पिछले तीन वर्षों से बढ़ाई नहीं गई। यही कारण था कि महाविद्यालय बंद पड़ा हुआ था। उन्होंने एक कमरा मदीना को किराए पर दिया। जहां पर वह अपनी दो बहुएं दो बेटी व दो बेटे के साथ रहती थी। उसने लगभग 14 कमरों में अवैध पटाखों का भंडारण कर रखा है। पैर में दिक्कत होने के कारण वह महाविद्यालय कई महीनो से नहीं आए। इस कारण से उनको यह जानकारी नहीं थी कि उनके महाविद्यालय में अवैध रूप से अवैध पटाखा फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है।
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अवैध पटाखा फैक्टरी मिलने पर छानबीन करती पुलिस। - फोटो : संवाद।
सबसे अलग बाथरूम के बगल के कमरे में बनते थे बड़े पटाखे

महाविद्यालय में एक किनारे बने बाथरूम के बगल बालिका वाचनालय में बड़े पटाखे बनाए जाते थे। वहीं पर बोरियों में भरकर बारूद भी रखा था। मौके पर पुलिस को इतना बारूद वहां मिला कि यदि कहीं भूल से भी चिंगारी बारूद में लगती तो महाविद्यालय के साथ आसपास  का इलाका भी धमाके से हिल जाता। महाविद्यालय की एक-एक ईंट भी मौके पर न मिलती। महाविद्यालय के भीतर का नजारा देखकर महाविद्यालय संचालक भी सकते में नजर आ रहे थे। वह खुद इतने हैरत में थे कि उनके महाविद्यालय के भीतर इतनी भारी मात्रा में बारूद आखिर संरक्षित कैसे पड़ा हुआ था। जिसकी उनको कानों कान भनक तक न लग सकी और पुलिस को जानकारी हुई और महाविद्यालय पर छापा डाल दिया।
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