ड्रिप सिंचाई पद्धति किसानों का उत्पादन तो बढ़ा ही रही है साथ ही पानी की खपत भी कम कर रही है। किसानों के मुताबिक बूंद-बूंद पानी टपकेगा तो नमी देर तक रहेगी। जिससे बार-बार सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। वहीं, उपकरण लगाने पर किसानों को अनुदान भी मिल रहा है। उद्यान विभाग की पहल से किसानों को समृद्ध बनाया जा रहा है।
ड्रिप सिंचाई से किसानों की फसलों के उत्पादन में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। बाबा बेलखरनाथ धाम के गोई गांव निवासी मो. असलम ने तीन वर्ष पहले दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में ड्रिप सिंचाई उपकरण अनुदान पर लगाए थे। केला, फूलगोभी, बैगन, शिमला मिर्च और ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए ड्रिप सिंचाई को अपनाया है।
विकासखंड गौरा के पूरे राम सहाय गांव निवासी मनोज भी ड्रिप सिंचाई से सब्जियां और ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं। बताया कि इस तकनीक से पानी कम खर्च होता है। इसी तरह लालगंज, कुंडा, पट्टी, रानीगंज के किसान भी ड्रिप सिंचाई का लाभ उठा रहे हैं।
इस वर्ष ड्रिप सिंचाई के लिए 178 हेक्टेयर क्षेत्रफल लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मिनी स्प्रिंकल 240 हेक्टेयर, पोर्टेबल स्प्रिंकलर 510 हेक्टेयर और लार्ज वैल्यूम के 220 हेक्टेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य मिला है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल पर ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति स्थापित करने पर 90 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। 80 फीसदी अनुदान सामान्य किसानों को दिया जाता है।
किसान आवश्यक प्रपत्र के साथ खतौनी, आधार कार्ड, पासबुक की फोटो कॉपी और एक फोटो कार्यालय में जमा कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की जांच के बाद किसानों को सिंचाई उपकरण पर अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
- सुनील शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी।