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चक्रवाती तूफान से सैकड़ों बीघे धान की फसल बर्बाद, सदमे में किसान

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प्रतापगढ़। सोमवार आधी रात को आए चक्रवाती तूफान ने जिले के कई हिस्सों में किसानों पर कहर बरपा दिया। तेज हवाएं चलने से तैयार हो रही धान की फसल खेतों में गिर गई। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। तूफान का सबसे ज्यादा असर लालगंज व पट्टी इलाके में रहा, जबकि रानीगंज, कुंडा व सदर क्षेत्र में इसका प्रभाव कम रहा। सुबह खेतों में फसल गिरी देख किसान सदमे में आ गए। दिनभर वह खेतों में फसल बचाने का प्रयास करते रहे।
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जिले में एक लाख तीस हजार हेक्टेअर में धान की खेती की गई है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार धान का दायरा बढ़ा है। करीब ढाई हजार हेक्टेअर ज्यादा धान की खेती हुई है। धान की रोपाई के दौ0रान मौसम ने भी खूब साथ दिया। इन दिनों धान की फसल में बाली आ रही थी। खेतों में लहलहाती फसल देखकर किसान खुश थे। उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। सोमवार रात करीब एक बजे आए चक्रवाती तूफान ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। करीब 30 से 35 मिनट तक चक्रवाती तूफान ने जमकर कहर ढाया। इससे धान की फसल खेतों में गिर गई। तूफान का सबसे ज्यादा असर लालगंज व पट्टी क्षेत्र रहा। लालगंज तहसील क्षेत्र के रानीगंज कैथौला से भटनी तक करीब 10 किमी तक चक्रवाती तूफान का दायरा रहा।
इससे किसानों की सैकड़ों बीघे खेत की फसल जमीन पर गिर गई। इसके अलावा अजगरा, मोहनगंज, लीलापुर, सांगीपुर में इसका असर आंशिक रहा। सोमवार की शाम तथा मंगलवार की सुबह 10 बजे के करीब विकास खंड बाबा बेलखरनाथ धाम के साथ विकासखंड मंगरौरा क्षेत्र में चक्रवाती तूफान संग बारिश होने से भी धान की फसल को नुकसान हुआ है। मंगरौरा क्षेत्र के किसान प्रशांत सिंह पुत्र विनोद सिंह अस्थरा दरछुट की धान की फसल लगभग 3 एकड़ खेत की फसल चक्रवाती तूफान और बारिश से गिर गई। सुबह फसल देखकर उनके पैरों तलों जमीन खिसक गई। बेलखरनाथधाम क्षेत्र के किसान रामलखन तिवारी, रति लाल यादव की फसल आंधी-तूफान के चलते जमीन पर गिर पड़ी। किसानों का कहना है कि धान की फसल से कमाई तो दूर अब फूटी कौड़ी भी नहीं नसीब होगी।
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