जिले के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। महिला अस्पताल में आने वाली प्रसव पीड़िताओं को अब बेड का अभाव बताकर डॉक्टर रेफर नहीं कर सकेंगे। प्रसव पीड़िता या फिर प्रसूताओं को जमीन पर नहीं लेटाया जाएगा। बनकर तैयार पांच मंजिला सौ बेड के महिला अस्पताल का संचालन नवरात्र में शुरू हो जाएगा। नवरात्र के प्रथम दिन से किलकारी भी इस अस्पताल में गूंजने लगेगी। प्रसव पीड़िताओं को भर्ती भी किया जाएगा।
जिला महिला अस्पताल का इमरजेंसी और लेबर रूम पूरी तरह जर्जर हो गया है। लेबररूम में भर्ती प्रसव पीड़िता या फिर प्रसूताओं पर टूटकर छत का प्लास्टर गिरता है। ऐसे में प्रसव पीड़िता, प्रसूता के साथ नवजात बच्चों की जान का खतरा बना रहता है। डॉक्टर प्रसव पीड़िताओं को कागज पर भर्ती कर अस्पताल परिसर में बने रैन बसेरा में बैठने के लिए कह देते हैं।
बेड के अभाव में प्रसव पीड़िता या फिर प्रसूता अपने बच्चों के साथ रैन बसेरा में रहती हैं। समय-समय पर डॉक्टर मरीजों को लेबर रूम में बुलाकर जांच करते रहते हैं। कुछ चिकित्सक ऐसे हैं जो बेड का अभाव बताकर मरीजों को भर्ती करने से हाथ खड़े कर देते हैं। दबाव पड़ने पर वह तत्काल रेफर कागज थमा देते हैं। इससे मरीज परेशान होते हैं। इस समस्या को देखत हुए महिला अस्पताल की सीएमएस रीना प्रसाद ने बीते दो माह पहले शासन को पत्र लिखा था।
उन्होंने ओपीडी चैंबर में इमरजेंसी को शिफ्ट कराए जाने की मांग की थी। शासन ने इस पर रोक लगा दी। निर्माणाधीन सौ बेड के अस्पताल को दो अक्तूबर तक तैयार कर हैंडओवर करने को कह दिया। सीएमओ ने कार्यदायी संस्था के ठेकेदार से बात कर दो तल तक के भवन को 29 सितंबर तक मांग लिया है। 27 सितंबर तक दो तल मंजिला में जो भी दिक्कतें हैं, उसे दूर कराने को कहा है।
स्वास्थ्य विभाग की मानी जाए तो सबकुछ ठीकठाक रहा तो 28 सितंबर को नवरात्र के एक दिन पहले महिला अस्पताल के इमरजेंसी और लेबर रूम को सौ बेड के अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया जाएगा। नवरात्र के प्रथम दिन से सौ बेड अस्पताल का संचालन शुरू हो जाएगा।
महिला अस्पताल का लेबर रूम और इमरजेंसी पूरी तरह जर्जर हो गया है। कभी भी हादसा हो सकता है। इसको देखते हुए कार्यदायी संस्था से बात कर ली गई है कि भवन हैंडओवर करने के पहले वह दो मंजिल तक विभाग को हैंडओवर कर दे। इसके अतिरिक्त जो निर्माण कार्य हैं, उसे पूरा कर जल्द से जल्द विभाग को हैंडओवर करें। जिससे अस्पताल का संचालन नवरात्र के प्रथम दिन से शुरू हो सके। आरएन यादव, जेई, स्वास्थ्य विभाग
महिला अस्पताल का लेबर रूम जर्जर हो गया है। इसलिए प्रसव पीड़िताओं को बाहर रखा जाता है। इस समस्या को देखते हुए नवरात्र के प्रथम दिन निर्माणाधीन सौ बेड के अस्पताल में इमरजेंसी और लेबररूम शिफ्ट करने की तैयारी है। इसके लिए एडी से अनुमति मांगी गई है।
डॉक्टर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।