स्टेडियम है, कोर्ट है, नेट और बॉल भी है, इंतजार है कोच का। कोच जो खिलाड़ियों को वॉलीबॉल में हुनरमंद बना सके। उनकी अंदर छिपी स्किल को उभारा सके लेकिन चार साल से खिलाड़ी आश्वासन के भरोसे अभ्यास कर रहे हैं। उन्हें अभी तक कोच नहीं मिला।
मीराभवन स्थित स्टेडियम में वॉलीबॉल खिलाड़ियों की प्रतिभा प्रशिक्षक के अभाव में दम तोड़ रही है। कुछ ने वॉलीबॉल में कॅरिअर बनाने के प्रयागराज और लखनऊ का रुख कर लिया। जो बच गए वह स्टेडियम में कोच की नियुक्ति की आस में हैं।
वर्ष 2022 में वॉलीबॉल प्रशिक्षक का स्थानांतरण होने के बाद से पद खाली है। रोजाना करीब 25 खिलाड़ी स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। प्रतियोगिताओं का दौर शुरू हो चुका है लेकिन खेल की बारीकियां सिखाने वाला कोई नहीं है।
तकनीकी कमियों को कैसे दुरुस्त करना ये समझाने वाला कोई नहीं है। ऐसे में खिलाड़ी अपने बलबूते पर खुद को और बेहतर करने में जुटे हैं। वह खिलाड़ी बोले
बगैर प्रशिक्षक के अभ्यास करना मुश्किल है। स्टेडियम में खेल के सभी संसाधन मौजूद हैं। प्रशिक्षक मिल जाएं तो अभ्यास बेहतर तरीके से होने लगेगा। हम जिले के लिए मेडल जीत सकेंगे। - कृष्णा शर्मा
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आपस में टीम बनाकर अभ्यास कर रहे हैं, तकनीकी जानकारी नहीं मिल पाती है। प्रतियोगिता के दौरान कोच की कमी अखरती है। प्रतियोगिताओं के दौरान सबसे अधिक जरूरत कोच की होती है। - ओजस सिंह
प्रतियोगिताएं शुरू हो चुकी हैं। इस सत्र में भी प्रशिक्षक मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। तकनीकी जानकारी न होने पर प्रदर्शन प्रभावित होता है। कोच न होने के कारण धीरे-धीरे खेलने का मन नहीं करता है। - आकांक्षा तिवारी
वर्जन
खेल निदेशालय को पत्र भेजकर प्रशिक्षक की मांग की गई है। जल्द ही विभाग प्रशिक्षक की तैनाती करेगा। - रंजीत यादव, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी
स्टेडियम में अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद
स्टेडियम में अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद
स्टेडियम में अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद