होली का दो दिनी त्योहार सात और आठ मार्च को मनाया जाएगा। सात मार्च को होलिका दहन और आठ मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। पंचांग के अनुसार होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6.24 से 8.51 बजे तक हैं।
सात मार्च को होलिका दहन की रात होलिका और भक्त प्रहलाद की पूजा होगी। ओम प्रकाश पांडेय अनिरुद्ध रामानुजदास के अनुसार होलिका दहन के पूर्व भगवान गणेश का स्मरण कर, जहां पूजा करनी है, वहां गंगाजल छिड़ककर पवित्र किया जाएगा। होलिका दहन वाली सामग्री अग्नि तत्व की दिशा यानी दक्षिण-पूर्व में रखी जाएगी।
पूजा करते समय यजमान होलिका के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठेंगे। पूजा के लिए तांबे के एक लोटे में जल, माला, रोली, चावल, गंध, फूल, कच्चा सूत, बताशे-गुड़, साबुत हल्दी, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग किया जाएगा। फिर होलिका में गोबर से बने बल्ले, नई फसल के हरे चने और गेहूं की बालियां अर्पित की जाएंगी।
फिर कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार लपेटकर होलिका की सात बार परिक्रमा की जाएगी। होलिका को अर्ध्य देने के बाद होलिका दहन किया जाएगा।