'हर चेहरा लाल गुलाबी घूंघटवाली भउजी कुदरानी, युवा वर्ग मस्ती में डूबा फिल्मी धुन पर लगा के ठुमका, गली-गली मा हुल्लड़बाजी हर चौराहा नाचन लागी।' यह पंक्तियां किसी गीत गजल की नहीं, बल्कि सोमवार को होली के रंग में डूबे लोगों का जीवंत चित्रण है। पर्व पर जिले का कुछ ऐसा ही नजारा रहा। हर कोई होली के रंग से सराबोर रहा। माहौल पूरी तरह से खुशमिजाजी रहा। रंजोगम भूल लोग एक दूसरे के गले मिलते दिखाई पड़े।
ईश्वर में आस्था की ताकत का अहसास कराने वाली होली जिले में चहुंओर हर्षोल्लास से मनाई गई। रविवार की रात करीब 07.30 बजे के बाद होलियारों ने जगह-जगह लगी होलिका का पूजन कर आग लगाई। रात भर वह होली की आग तापते रहे। भोर होते ही वे होली की मस्ती में डूब गए। माहौल पूरी तरह खुशमिजाज हो गया। हर तरफ रंगों की बारिश होने लगी। चौराहों से गुजरने वाले हर व्यक्ति को रंग से भिगोकर होली की बधाई देते रहे। शहर से लेकर गांव तक सैकड़ों स्थान पर युवाओं ने डीजे और साउंड की व्यवस्था कर रखी थी। सुबह 10 बजे होली का पर्व बुलंदियों पर पहुंच गया। कोई भांग तो कुछ लोग शराब के नशे में धुत फिल्मी धुनों पर हर चौराहे पर थिरकते रहे। एक भी शख्स ऐसा नहीं जिसका चेहरा लाल, गुलाबी व पीला न हो। बेमिसाल का सामंजस्य भी देखने को मिला। अनजाने व्यक्तियों पर भी लोग खूब रंग डालते रहे और वे मुस्कराते हुए जाते रहे। शहर से लेकर गांव तक की गलियों का नजारा अद्भुत रहा। हर कोई हाथ में रंग लपेटे किसी के चेहरे पर मलने की ताक में रहा। मौका पाते ही दौड़ा कर लोगों को वे रंग लगाते दिखाई पड़े। किसी के सामने घूंघट न खोलने वाली महिलाएं भी होली के शुरूर में डूबी रहीं। घर से दरवाजे तक आने जाने वालों को वे भी रंग से भिगोने में तनिक संकोच नहीं कर रही थीं। यह स्थिति गंवई इलाकों में खूब सुनने व देखने को मिली। पूरा माहौल खुशनुमा और खुशियों भरा रहा। हर कोई होली की मस्ती में चूर रहा। आंखों देखा हाल बयां करें तो हर चेहरा एक सा दिखा। मंजर पूरी तरह एकता और भाई चारे का रंग बिखेर रहा था। जिले में लगभग दो हजार के लगभग होलिका दहन किया गया।
वहीं कपड़ा फाड़ होली तो यूं कई चौराहों पर खेली गई, मगर शहर के चौक में इस होली का कुछ खास ही अंदाज इस बार भी दिखा। होली के रंग में डूबी युवाओं की टोली दोपहर करीब दो बजे चौक घंटाघर पर एकत्र हुई। फिल्मी गीतों की धुन पर नाचते गाते युवा एक दूसरे का कपड़ा जबरिया फाड़ते रहे। स्थिति यह रही कि पैंट छोड़ बाकी बदन का सारा कपड़ा फाड़ कर वे घंटाघर की रेलिंग या फिर बिजली के तार पर उछाल कर टांग दिए। यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में भी रही। शहर में दोपहर को अजीबोगरीब नजारा देख लोग दंग रह गए। एक सफेद कलर की स्विफ्ट कार सवार चार युवक नशे में धुत थे। वे चौक से आगे निकले और बाबागंज के पास पहुंचते ही कार के पीछे का गेट दोनों ओर का खोल लिया। दरवाजा खोलने के बाद दोनों युवक खड़े होकर हवा में पिस्टल लहराते हुए नारेबाजी करने लगे। हवा में पिस्टल लहराने के कारण वह जिधर से गुजरते, उधर लोग सहम जाते। खास बात यह देखने को मिली कि पुलिस को देखते ही कार सवार युवक अंदर बैठ जाते थे। पूरे शहर का वे चक्कर लगाते रहे।