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बढ़े किताब-कॉपियों के दाम, कटेगी जेब

Tue, 27 Mar 2018 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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नए शिक्षासत्र में किताब-कॉपियों के दाम में भारी इजाफा किया गया है। कान्वेंट स्कूलों के प्रबंधन और दुकानदारों की मिलीभगत के चलते अभिभावकों के जेब कर डाका डाला जा रहा है। किताब-कॉपी की बिक्री में कान्वेंट स्कूल संचालक मोटी रकम की कमाई कर रहे हैं, मगर इनकी तरफ कोई भी अधिकारी नजरें उठाकर देखने वाला नहीं है। अभिभावकों की जेब पर फीस के रूप में तो कांवेट स्कूल अच्छी खासी कमाई करते ही हैं साथ ही कॉपी-किताबों की फिक्स से खरीदने को कहकर खूब कमीशन भी लेते हैं जो अभिभावक की ही जेब से जाता है।
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जिले के कान्वेंट स्कूलों का नया शिक्षासत्र दो अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को नई कक्षाओं में प्रवेश दिलाने और नई कक्षा के लिए कॉपी-किताब खरीद रहे हैं। कान्वेंट स्कूलों के कॉपी-किताबों के दामों में बेतहाशा वृद्धि की गई है। दरअसल किताबों पर ट्रेडर्स को 40-45 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता है, जबकि कॉपियों पर 32-45 प्रतिशत तक कमीशन होता है। मगर दुकानदार अभिभावकों को प्रिंट रेट से एक भी रुपये कम करने को तैयार नहीं है।

ऐसा इसलिए होता है कि कान्वेंट स्कूल प्रबंधन ने अपनी -अपनी दुकान सेट कर रखी हैं। उस स्कूल की किताब उसी दुकान पर मिलेगी, जहां स्कूल संचालकों ने सेटिंग कर रखी है। अभिभावकों की इस मजबूरी का फायदा दुकानदार और संचालक उठाते हैं। रविवार को नवरात्र का अंतिम दिन होने के कारण अभिभावक दुकानों पर पहुंचकर बड़ी संख्या में किताब-कॉपी की खरीदारी की। दुकानदार काली कमाई को छिपाने के लिए चेक, ऑनलाइन लेने के बजाय नकद रुपये ही ले रहे थे।
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25-30 प्रतिशत बढ़ गई फीस
कांवेंट स्कूलों में मंहगाई की दुहाई देकर 25-30 प्रतिशत फीस की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। शासन की मनाही के बावजूद प्रत्येक कक्षा में दाखिले के लिए प्रवेश शुल्क वसूली की तैयारी की जा रही है। स्कूल पहुंचने वाले अभिभावकों को वसूली की लिस्ट भी थमाई जा रही है। चार महीने चलने वाले जनरेटर के लिए बारह महीने फीस की वसूली की जा रही है।

प्रत्येक स्कूल की सेट है अपनी दुकान
शहर के सभी कांवेंट स्कूलों की अपनी दुकान सेट है। भंगवाचुगी रोड, कचहरी रोड, जीआईसी के सामने, जीजीआईसी के सामने खुली दुकानों पर कॉपी-किताब भरे हुए हैं। स्कूलों के कमीशन सेट होने वाली दुकानों पर ही उस स्कूल की किताब मिल रही है। इससे अभिभावक किताब-कापी खरीदने को मजबूर हैं।

सौ रुपये से कम नहीं है कोई किताब
कांवेंट स्कूलों में कोई किताब सौ रुपये से कम की नहीं है। अन्य किताबों की बात छोड़ दें, तो अलग-अलग स्कूलों में कक्षा दो से पांच तक की आर्ट एंड क्राफ्ट की बुक अलग-अलग स्कूलों में 240-280 रुपये में बिक रही है। इन किताबों में पेज की संख्या काफी कम है। इसके साथ ही इंग्लिश रीडर, इंग्लिश लैैंग्वेज की किताब 180-220 रुपये, मैथमेटिक्स की किताब 280-330, विज्ञान की किताब 350-400, हिंदी की किताब 230-280, सामाजिक विज्ञान की किताब 299-335, कंप्यूटर बुक 200-225, जीके बुक 200-240, मोरल साइंस बुक 240-260, कर्सिव राइटिंग बुक 150-180 और राइटिंग (हिंदी) की बुक 110-130 रुपये तक बेची जा रही है। इसमें ज्यादातर किताबें लोकल प्रकाशकों की हैं।

कॉपियों में वसूल रहे अतिरिक्त रुपये
ए ग्रेड की कॉपियों पर प्रिंट रेट पर ट्रेडर्स को 32 प्रतिशत तक छूट मिलती है, जबकि अन्य कंपनियां 40-45 प्रतिशत छूट देती है। बाजार में ए ग्रेड की इंग्लिश, हिंदी, मैथ्स की कॉपी 32-35 रुपये में बिक रही है। छूट के हिसाब से कॉपी की कीमत 10 से 13 रुपये तक सस्ती मिलनी चाहिए, मगर कांवेंट स्कूलों के अधिकृत दुकानों पर वही कॉपी 32 से 35 रुपये एमआरपी पर बिक रही है। कॉपियों पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। मगर दुकानदार अभिभावकों से तो जीएसटी बताकर रुपये वसूल रहे हैं, मगर पक्की रसीद न देकर टैक्स की बंपर तरीके से चोरी कर रहे हैं। अभिभावक जब भी कॉपी किताब खरीदें उसकी पक्की रसीद जरूर लें और कोशिश करें कि उसका भुगतान कैश के बजाय ऑनलाइन करें।
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