जिले की 443 सड़कों को गड्ढामुक्त करने में जमकर खेल हुआ है। डीएम के निर्देश पर हुई जांच में सामने आया कि 107 सड़कों पर बगैर मरम्मत कराए ही भुगतान कर लिया गया है। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है डीएम के नोटिस जारी करने के बाद भी अधिकांश सड़कों को गड्ढामुक्त नहीं किया गया है।
लोक निर्माण विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सड़कों को गड्ढामुक्त करने में लाखों रुपये का खेल हुआ है। जिले में आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले तत्कालीन डीएम शंभु कुमार ने 443 सड़कों का सत्यापन करने की जिम्मेदारी जिले के 41 जनपद स्तरीय अधिकारियों को सौंपी थी। अफसरों की जांच में खुलासा हुआ कि जिले की 107 सड़कें ऐसी हैं, जिन पर बगैर निर्माण कराए ही भुगतान कर लिया गया है। मानधाता के ठेमा संपर्क मार्ग, संडवा चंद्रिका के पाराहमीदपुर से मंगापुर संपर्क मार्ग, सदर के महुआर संपर्क मार्ग, रानीगंज के उड़ैयाडीह से गजरिया बीरापुर संपर्कमार्ग, उड़ैयाडीह से सराय छिवलहा मार्ग, अमहटा संपर्क मार्ग, नौडेरा स्वरूप संपर्क मार्ग, साल्हीपुर कंजास संपर्क मार्ग, सरौली संपर्क मार्ग, अमुवाही संपर्क मार्ग सहित 107 सडक़ों को गड्ढामुक्त करने में जमकर खेल हुआ है। आश्चर्य की बात तो यह है कि डीएम ने नोटिस देकर इन सड़कों के गड्ढे अविलंब पाटने को कहा था। मगर इसके बाद भी सड़कों की दशा में सुधार नहीं हो रहा है।
दोषियों पर कब होगी कार्रवाई
जिले की जो सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हैं, उनमें अधिकांश लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड और लोक निर्माण विभाग खंड द्वितीय की सड़कें शामिल हैं। दोनों विभागों के अफसरों पर जांच की तलवार लटक रही है। डीएम ने भी मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अहम सवाल यह है कि गड़बड़ी करने वालों पर आखिर कार्रवाई कब होगी।
जिले की 443 सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए शासन से धनराशि मिली थी। अफसरों की जांच में 107 सड़कों को गड्ढामुक्त नहीं किया गया है। मामला डीएम के संज्ञान में है, विभागीय अफसरों को नोटिस देकर अविलंब दुरुस्त कराने को कहा है।
आरके सिंह, डीएसटीओ।