वारंट के समय मृत बताया जा रहा वृद्ध कुर्की का आदेश जारी होते ही जिंदा हो गया। पुलिस उसे लेकर कोर्ट में पेश हुई। जिसे लेकर हंगामा खड़ा हो गया। जज ने वृद्ध को कस्टडी में लेने का निर्देश सुनाया। इसके बाद उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्रधान और उसी रिपोर्ट का सत्यापन करने वाले एसआई पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। हालांकि बाद में वृद्ध के पढ़े लिखे न होने और किसी कागज के बारे में कोई जानकारी न होने पर उसे छोड़ दिया गया।
महेशगंज थाना क्षेत्र के ऐंधा गांव निवासी रघुनाथ पुत्र राजाराम पर 2010 में गाली- गलौज व तोड़फोड़ का मुकदमा दर्ज हुआ था। कोर्ट में यह मामला सरकार बनाम रघुनाथ आदि के साथ चल रहा था। वह काफी दिन कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा था। इसके कारण न्यायालय से उसके खिलाफ वारंट जारी हो गया। इसके बाद वह हाजिर नहीं हुआ तो गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। बीते दो फरवरी को उसका गैरजमानती वारंट तारीख पर बहाल हुआ तो अगली तारीख तीन मार्च को ग्राम प्रधान कुसुम देवी द्वारा उपलब्ध कराया गया उसका मृत्यु प्रमाणपत्र पुलिस ने न्यायालय में भेज दिया। हालांकि इसके बाद भी उसके खिलाफ 82 की कार्रवाई हो गई। उसके खिलाफ 82 की कार्रवाई हुई तो पुलिस ने गुुरुवार को उसे पकड़कर कोर्ट में हाजिर कर दिया। जमानत के दौरान पता चला कि उसका मृत्यु प्रमाणपत्र पहले ही जारी किया जा चुका है। इसकी जानकारी होने पर एसीजेएम घनेंद्र कुमार ने उसे कस्टडी में लेने का आदेश सुनाया। पूछताछ में पता चला कि मृत्यु प्रमाणपत्र प्रधान ने जारी किया और एसआई एपी कुशवाहा ने इसका सत्यापन किया। इसके बाद एसओ महश्ेागंज ने इसे न्यायालय भेजा है। पूरी जांच करने के बाद एसीजेएम के निर्देश पर प्रधान व एसआई पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट कोर्ट में ही दर्ज कर ली गई। बाद में वृद्ध की हालत देखते हुए उसे जमानत दे दी गई।