परीक्षा देने वाले 90 फीसदी फेल
बीएससी संकाय के दो फीसदी परीक्षार्थी हुए पास
राज्य विश्वविद्यालय इलाहाबाद के परीक्षा परिणाम से कॉलेजों में हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिला मुख्यालय पर परीक्षा देने वाले दर्जनभर कॉलेजों के 90 फीसदी से अधिक परीक्षार्थी फेल हो गए हैं। वहीं विज्ञान संकाय के परीक्षार्थियों के फेल होने का यह आंकड़ा लगभग 98 फीसदी तक पहुंच गया। इस खराब रिजल्ट से इन कॉलेजों की साख दांव पर लग गई है। अच्छा परीक्षा परिणाम न आने से इलाके के छात्र-छात्राएं इन कालेजों में दाखिला नहीं ले रहे हैं।
राज्य विश्वविद्यालय इलाहाबाद ने नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए शुरू से ही सख्ती कर दी थी। परीक्षा केंद्र निर्धारण से पहले कॉलेजों से सूचनाएं मांगी गई थीं। जिसमें स्ट्रांग रूम के साथ ही परीक्षा कक्षों में कंप्यूटर लगे होने के साथ परीक्षा केंद्र में होने वाली अनिवार्य व्यवस्थाओं के संबंध में सूचनाएं मांगी गई थीं। साथ ही पूर्व के अवध विश्वविद्यालय द्वारा नकल में आरोपित न होने की स्थिति के बारे में पूछा गया था। जिसमें दर्जनभर कॉलेज नकलची पाए गए। साथ ही उन कॉलेजों में परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं भी अपूर्ण पायी गईं। हालांकि उन्होंने विश्वविद्यालय से परीक्षा केंद्र बनाए जाने के लिए आग्रह किया था, लेकिन विश्वविद्यालय नकलविहीन परीक्षा को ध्यान में रखते हुए इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया और इनकी परीक्षाएं जिला मुख्यालय स्थित अनुदानित कालेजों में कराई। परीक्षा परिणाम आने के बाद छात्र-छात्राओं के साथ ही कॉलेज प्रशासन हिल गया है। दरअसल, इन कॉलेजों में बीए, बीकाम के 90 फीसदी परिक्षार्थी फेल हैं। वहीं बीएससी संकाय के पास होने वाले परिक्षार्थियों का आंकड़ा महज दो फीसदी है। ऐसे में आस-पास के लोगों में इन कॉलेजों को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। परिजन अपने बच्चों का दाखिला इन कॉलेजों में नहीं करा रहे हैं। बल्कि वह दूर दराज स्थित कॉलेजों में दाखिले के लिए तैयार है। वहीं कॉलेज संचालकों का कहना है कि ग्रेडिंग और ओएमआर पैटर्न की वजह से अधिकांश परीक्षार्थी फेल हुए हैं। दरअसल, उन्हें इस परीक्षा पद्धति के बारे में जानकारी नहीं थी। साथ ही इस पैटर्न पर परीक्षा कराने का निर्णय विश्वविद्यालय ने एकाएक लिया था।
वर्जन-
जिन कॉलेजों की सूचनाएं अपर्याप्त थीं। उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा केंद्र नहीं बनाया। साथ ही मूल्यांकन कार्य भी सख्ती से किया गया है।
दीप्ति मिश्रा, उपकुलसचिव, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय