समय सीमा पूरी, फिर भी नहीं बन सका तालाब
29.68 लाख की लागत से तीन माह के भीतर होना था निर्माण
शहीद उद्यान में चारों ओर फैला है मैटेरियल, घूमने वालों को होती है परेशानी
आधा काम भी नहीं हो सका पूरा, पहले से तालाब वाले स्थान पर लगा था फौव्वारा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नगर पालिका के अफसरों की लापरवाही का खामियाजा शहरियों को भुगतना पड़ता है। निर्माण कार्य हो या फिर शहर की सफाई। कोई कार्य समय पर पूरा नहीं हो पाता। शहीद उद्यान में 29.68 लाख की लागत से बन रहा तालाब समय सीमा पूरा होने के बाद भी नहीं बन सका। अफसरों की मेहरबानी से निर्माण कार्य पूरा होने में समय लगेगा। उद्यान में चारों ओर मैटेरियल फैला हुआ। जिससे उद्यान में घूमने वाले लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
नगरीय झील/ तालाब व पोखर संरक्षण योजना के तहत शहीद उद्यान में तालाब का सुदृढ़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य 6 मार्च 2019 को प्रारंभ हुआ। तालाब का निर्माण व सौंदर्यीकरण का काम तीन माह के भीतर पूरा होना था। 29.68 लाख की लागत से बनने वाला तालाब पहले निर्मित झील पर ही बनाया जा रहा है। झील में ही फौव्वारा बनाया गया था। वहां बत्तख भी पाले गए थे। चारों ओर इंटरलाकिंग का निर्माण कराया गया था ताकि लोग उसके अगल-बगल घूम सके। घूमने के लिए आने वाले लोगों के बैठने की भी व्यवस्था की गई थी। 6 मार्च से चल रहे तालाब का निर्माण 5 जून को पूरा हो जाना था लेकिन ऐसा हो नहीं सका। लोगों की मानें तो नगर पालिका के अफसर एक ठेकेदार पर मेहरबान हैं। जिनके पास शहर में कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। समय मिलने पर ही वह निर्माण कार्य शुरू कराते हैं। नगर पालिका के नियम कानून उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। अफसरों की नोटिस को भी खेल समझा जाता है। तभी तो तीन माह के भीतर तालाब बनकर तैयार होना तो दूर आधा भी नहीं बन सका। नगर पालिका के ईओ मुदित सिंह का कहना है कि काम चल रहा है। जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। कुछ कारणों से काम प्रारंभ होने में विलंब हुआ था।
इंटरलाकिंग की नींव पर ही खड़ी कर रहे दीवार
शहीद उद्यान में झील के किनारे फौव्वारा का निर्माण कराया गया था। तराशे गए पत्थर भी लगाए गए थे। उसके चारों ओर इंटरलाकिंग का निर्माण कराया गया है। इंटरलाकिंग की नींव पर ही दीवार बनाई जा रही है। जिसे देखने की जेई नगर पालिका एसएन सिंह को फुर्सत ही नहीं है। पुराने मलबे का मजदूर खुलेआम प्रयोग कर रहे हैं।