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कोटेदारों की मनमानी रोकने में नाकाम है प्रशासन

Sat, 10 Jan 2015 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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कोटेदारों की मनमानी पर प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में तो लोगों को यह भी पता नहीं है कि एपीएल कार्ड पर भी राशन आता है। ऐसे गांवोें में कई-कई महीने राशन कार्डधारकों को नहीं मिलता। शिकायत होने और अधिकारियों के आने के बाद भी उन्हें धता बता दिया जाता है। एपीएल कार्ड पर आने वाला राशन कम होता है। इस राशन को बांटने के लिए कोटेदार को विवेक का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। यानी जो पहले आए उसे दे दिया जाए। अब स्थिति यह है कि पहले आया कौन। कोटेदार अपने खास लोगों के नाम लिखकर कागज में राशन बांट देते हैं। यह कार्य हर बार किया जाता है।
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यही नहीं क्षेत्र के कई गांवों में तो राशन दो-दो महीने बाद बांटा जाता है। कोटेदार राशन का वितरण महीने की अंतिम और पहली तारीख को मिलाकर करते हैं। इससे यह स्पष्ट ही नहीं हो पाता कि यह किस महीने का राशन है। अगर प्रधान आदि से मिलकर शिकायत की जाती है तो अधिकारी थोड़ा बहुत संज्ञान लेते हैं लेकिन अगर प्रधान और कोटेदार के बीच तालमेल है तो शिकायत होना भी मुश्किल है। शिकायत होने और अधिकारियों के आने के बाद भी कोटेदार उन्हें धता बताते हैं। यही नहीं कभी-कभी तो खुद को मंत्री के साथ होने की भी बात कह देते हैं। ऐसे में जांच अधिकारी मन मसोस कर रह जाता है।

कुंडा। तमाम गांवों के लोगों के राशनकार्ड कोटेदारों के घर रखे हुए हैं। जब धारक को जरूरत होती है तो वह कोटेदार के घर का चक्कर लगाता है। ऐसे में कोटेदार भी जैसे चाहे घुमाते हैं। ऐसे लोगों के कार्ड पर हर महीने का राशन चढ़ा होता है। जांच में इनकी ही गवाही और कार्ड भी दिखाए जाते हैं। शिकायतकर्ता के बारे में कहा जाता है कि वह राशन लेने आया ही नहीं तो क्या घर पहुंचाया जाए।
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