बाईपास निर्माण में जिले के अफसर बाधक बन गए हैं। किसानों को मुआवजा बांटने के लिए मिले 187.57 करोड़ डंप हैं, मगर एक साल बाद भी मुआवजे की रकम बांटने के लिए कोई पहल नहीं हुई है। किसानों को मुआवजे की रकम नहीं बांटने से बाईपास निर्माण कार्य अधर में लटक गया है।
शहर को जाम के झाम से मुक्ति दिलाने के लिए तैयार होने वाले बाईपास के निर्माण का कार्य अफसरों की लापरवाही के चलते अधर में लटक गया है। गोड़े से सुखपालनगर तक बनने वाले बाईपास के निर्माण के लिए हाईवे ने हरी झंडी दे दी है। सांसद हरिवंश सिंह की पहल पर राजस्व विभाग की टीम ने बाईपास में किसानों की आने वाली जमीन का अंकन और मुआवजे की राशि का निर्धारण करके 187.57 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को अवमुक्त कर दिए हैं।
बीते वर्ष जिला प्रशासन को मिली यह धनराशि 19 गांवों के 2142 किसानों को वितरित की जानी है। दरअसल, मुआवजे की राशि वितरित करने से पहले राजस्व विभाग की टीम को गांव-गांव जाकर लाभार्थियों का सत्यापन करना है, इसमें यह देखना है कि जिस व्यक्ति की जमीन जा रही है, क्या उसी को मुआवजे की राशि मिल रही है। साल भर का समय बीत गया, न तो राजस्व विभाग की टीम ने गांवों में जाकर अभी तक सत्यापन किया है और न ही वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित हो पाई है।
मुआवजे का वितरण नहीं होने से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय निर्माण की दिशा में कोई कदम उठाने को तैयार नहीं है। फिलहाल अफसरों ने जल्द मुआवजा बांटने की पहल नहीं की, तो अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव तक निर्माण कार्य अधर में लटक सकता है।
आपत्तियों का नहीं हुआ निस्तारण
बाईपास के दायरे में आने वाले भू-स्वामियों को मुआवजा देने के लिए गजट किया गया था। इसके बाद मुआवजे के दावेदारों की संख्या बढ़ गई थी। अधिकांश ऐसे मामले हैं, जिनका अभी तक निस्तारण नहीं हुआ है। अगर विवादित मामलों का निस्तारण नहीं होता है, तो बाद में बाईपास निर्माण में समस्या खड़ी हो सकती है।
बाईपास निर्माण के लिए किसानों के मुआवजे को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इसी माह में आठ गांव के किसानों का सत्यापन कराकर मुआवजा वितरित कर दिया जाएगा। बचे हुए गांवों में अभियान चलाकर मुआवजे का वितरण किया जाएगा।
हरिवंश सिंह, सांसद।
बाईपास के लिए जिन किसानों की जमीन ली गई है, उनका सत्यापन कराया जा रहा है। इसी माह से मुआवजा दिया जाएगा।
शंभु कुमार, डीएम।