बीते वर्षों की अपेक्षा हज यात्रा महंगी होने का असर जायरीन पर पड़ा है। भले ही जिले का कोई कोटा निर्धारित नहीं किया गया है। मगर, महंगाई की वजह से अब तक सवा सौ लोगों ने ही आवेदन किया है। हज पर जाने वाले जायरीन को पिछली बार से 55 हजार रुपये अधिक देने पड़ रहे हैं।
कोरोना वायरस के कारण लगातार दो वर्षों से स्थगित की जा रही पाक हज यात्रा के लिए बीते वर्ष हज कमेटी की ओर से पाबंदियों के साथ हज पर जाने वाजे जायरीन से आवेदन मांगे गए थे। बीते वर्ष हज पर जाने वाले लोगों की उम्र पर पाबंदी थी, लेकिन इस बार रोक नहीं है। हज यात्रा शुरू करने से एक माह पहले ही बूस्टर डोज लगना जरूरी है।
खास बात यह है कि पिछली बार हज यात्रियों को हज पर जाने के लिए 3,95,000 रुपये प्रति व्यक्ति तक खर्च करने पड़े थे। मगर इस बार उन्हें 4,50,000 रुपये खर्च करने होंगे जबकि वर्ष 2019 में हजयात्रा पर जाने वालों को अजीजिया क्लास के लिए 2,36,000 रुपये तथा ग्रीन क्लास के लिए 2,82,000 रुपये खर्च करने पड़े थे।
हज कमेटी के मास्टर ट्रेनर मुन्ना जाफरी के मुताबिक अब तक हज पर जाने वाले आजमीनों का कोटा होता था। आवेदन करने वालों की संख्या भी पांच से सात सौ तक रहती थी। मगर अब महंगाई की वजह से इस वर्ष भी संख्या कम होती जा रही है। पहले सउदी में खर्च के लिए रुपये मिलते थे। वह भी बंद कर दिया गया।
ऐसे में खर्च में तकरीबन 55 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब तक उनकी ओर से 92 जायरीन का पंजीकरण कराया गया है। कुंडा से करीब 25 आवेदन हुए हैं। इस तरह करीब सवा सौ जायरीन ने अब तक आवेदन किए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि दस मार्च थी, लेकिन अब यह तारीख बढ़ाकर 20 मार्च कर दी गई है। हज यात्रा बीते वर्षों के मुकाबले महंगी हुई है।
बच्चों के साथ उमरा के लिए हुए रवाना
शहर के पलटन बाजार के रहने वाले कारोबारी अफजल अपनी बीवी शीबा, बेटी अदीबा, बेटे अयान व अकरम के साथ शनिवार को उमरा के लिए रवाना हुए। उन्हें विदा करने के लिए परिवार के सदस्यों के अलावा रिश्तेदार भी थे। हर कोई उनसे मक्का व मदीना में इबादत के दौरान दुआ की दरख्वास्त करता रहा। अफजल के बड़े भाई मुख्तार खान परिवार के लोगों के साथ सभी को लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाने गए।