एक ही कमरे में पांच कक्षाओं के बच्चों को पढ़ा रहे हैं गुरुजी। बच्चे भी अपनी बारी का इंतजार करते की कब उनको गुरुजी पढ़ाएंगे। एक ही चटाई पर अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाने के दौरान शिक्षक खुद दुविधा में है कि वह किसको क्या पढ़ा रहे हैं। यह नजारा शनिवार को नगर क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल बेगमवार्ड में देखने को मिला।
शहर के निजी स्कूलों से बराबरी करने का दंभ भरने वाले नगर क्षेत्र के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। आलम यह है कि कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को एक ही शिक्षक पढ़ा एक साथ एक ही कमरे में पढ़ा रहा है। यह हाल केवल एक या दो स्कूलों का नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक स्कूल हैं। नगर क्षेत्र के कुल 22 स्कूल हैं। इसमें 11 प्राइमरी, दो मिडिल और नौ कंपोजिट स्कूल हैं। इसमें प्राइमरी स्कूलों में 1277 और मिडिल स्कूलों में 521 स्कूल है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए महज 44 शिक्षक हैं।
0 शहर के प्राइमरी स्कूल बेगमवार्ड में 30 बच्चे नामांकित हैं। शनिवार, दोपहर बाद एक कमरे में पांच कक्षाओं के बच्चे बैठे पढ़ रहे थे। साथ ही एक और दुविधा है कि जब शिक्षक छुट्टी पर होते हैं तो स्कूल में ताला लटकता रहता है। क्योंकि उन्हीं के भरोसे यह विद्यालय चल रहा है।
0 पुराना माल गोदाम रोड स्थित कन्या क्रमोत्तर स्कूल में एक शिक्षक कलीमुद्दीन तैनात हैं। लोकमान्य तिलक इंटर कॉलेज में बीएलओ के रूप में ड्यूटी लगा दी गई है। जिससे शनिवार को वह स्कूल में नहीं मिले। स्कूल में रसोइयां बेटी को लेकर बैठी थी। स्कूल में 36 बच्चे नामांकित हैं, मगर शनिवार को सिर्फ एक बच्ची स्कूल में मिली।
33 साल से शिक्षक की नहीं हुई भर्ती
नगर क्षेत्र में इन स्कूलों में 33 साल से शिक्षक भर्ती नहीं हुई है। दरअसल में ग्रामीण इलाकों में तैनात शिक्षकों को नगरीय क्षेत्र में नहीं तैनात किया जाता है। नगरीय क्षेत्र में शिक्षकों की भर्ती अलग से होती है। मगर 1990 के बाद शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई है।
दो स्कूल में तो शिक्षक ही नहीं हैं
नगर क्षेत्र के माधवगंज प्रथम और द्वितीय में शिक्षक ही नहीं हैं। इनमें दूसरे स्कूलों के एक-एक शिक्षक को स्कूल चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्राइमरी स्कूल शंकरदयालरोड, पुराना मालगोदाम रोड़, मकंद्रूगंज तृतीय, सहोदरपुर प्रथम, द्वितीय, बलीपुर, मकंद्रूगंज में एक-एक शिक्षक की तैनाती की गई है।
नगर क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की बहुत कमी है, मामला शासन के संज्ञान में है, जल्द ही कोई विकल्प खोजा जाएगा। मुझे भी जो समय मिलता है, स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाता हूं। - शिव बहादुर मौर्य, खंड शिक्षा अधिकारी , नगर क्षेत्र