प्रतापगढ़। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2024-25 से स्नातक के चार वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित होंगे। इसके बाद विद्यार्थी एक वर्ष की पढ़ाई पूरी कर परास्नातक की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, चार वर्षीय स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को स्नातक ऑनर्स की डिग्री मिलेगी और विद्यार्थी पीएचडी में दाखिले व नेट परीक्षा के लिए अर्ह होंगे। विश्वविद्यालय की नई गाइडलाइन के अनुसार वर्ष 2024 से स्नातक में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष की पढ़ाई पर डिग्री प्रदान की जाएगी। प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूर्ण करने पर सर्टिफिकेट, दो वर्ष पर डिप्लोमा, तीन वर्ष पर स्नातक और चार वर्ष पर शोध सहित ऑनर्स स्नातक की डिग्री प्रदान की जाएगी। वहीं, एक साल की और पढ़ाई करने पर परास्नातक की उपाधि प्रदान की जाएगी। चतुर्थ वर्ष के द्वितीय सेमेस्टर में एक लघु शोध परियोजना का भी प्रावधान हैं। जबकि पांचवें वर्ष का अंतिम सेमेस्टर पूर्ण रूप से शोध कार्य (शोध-प्रबंध) पर आधारित है। महाविद्यालयों में पंजीकृत जिन विद्यार्थियों ने बीए, बीकॉम एवं बीएससी पढ़ाई पूरी कर ली है, वह अब सीधे चौथे साल में प्रमोट कर दिए जाएंगे। ये विद्यार्थी चार वर्ष का स्नातक पूरा करने के बाद एक वर्ष का परास्नातक पाठ्यक्रम की पढ़ाई भी कर सकेंगे। दो साल की पढ़ाई करने पर परास्नातक की उपाधि प्रदान की जाएगी। वहीं, विश्वविद्यालय ने स्नातक और परास्नातक के लिए नई शिक्षा नीति के तहत नया पाठ्यक्रम लागू कर दिया है।
राज्य विश्वविद्यालय से संबंद्ध महाविद्यालयों में इस सत्र से स्नातक के चार वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित होंगे। पांच वर्ष की पढ़ाई करने पर छात्रों को परास्नातक की डिग्री मिलेगी। चार वर्षीय स्नातक करने वाले विद्यार्थी पीएचडी के लिए मान्य होंगे, लेकिन उन्हें शोध के दौरान एक वर्ष का कोर्स वर्क अनिवार्य रूप से करना होगा।
- प्रो.अमित कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, पीबीपीजी काॅलेज।