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हाईटेक होगा राजकीय पुस्तकालय

Fri, 23 Dec 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
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जिले का एकमात्र राजकीय पुस्तकालय हाईटेक होने जा रहा है। छह लाख रुपये में पुस्तकालय में बाल कक्ष, गार्डन व साइकिल स्टैंड बनाया जाएगा। 5 से 60 वर्ष तक के लोगों को मुफ्त कम्प्यूटर शिक्षा भी दी जाएगी। बच्चों के खिलौने भी आ रहे हैं। देश विदेश की खबर देखने के लिए बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी। मुफ्त वाईफाई सुविधा शुरू हो गई है।

शासन की ओर से 17 वर्ष पहले जीआईसी के बगल राजकीय पुस्तकालय खुलवाया गया था। पुस्तकालय में लगभग 20 हजार पुस्तकें मौजूद हैं। इसमें उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद और प्रख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन समेत कई हिंदी के नामी कवियों समेत विवेकानंद और अन्य महापुरुषों की जीवनी, जनरल नालेज के साथ प्रतियोगी तैयारी के लिए भी किताबें रखी गई हैं। पत्रिकाएं और समाचार पत्र भी मंगाए जाते हैं। जर्जर भवन होने और बैठने की जगह न होने के कारण सदस्यों की संख्या कम होने लगी थी। पुस्तकालय अध्यक्ष ने शासन के साथ डीएम को पत्र भेजकर पुस्तकालय की समस्या के बारे में अवगत कराया। साथ ही समाजसेवियों से पुस्तकालय भवन की मरम्मत के लिए सहयोग मांगा।
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पुस्तकालय अध्यक्ष श्याममूर्ति ने बताया कि एलायंस क्लब के डिस्ट्रीक गर्वनर रोशनलाल ने पुस्तकालय भवन की रंगाई पुतवाई कराई थी। शासन ने इस समस्यां को संज्ञान में लेते हुए पुस्तकालय भवन की मरम्मत के साथ सुविधाओं के लिए 6 लाख 24 हजार रुपये का बजट पास कर दिया है। अब पुस्तकालय भवन के बगल साइकिल स्टैंड के साथ पार्क बनेगा। साथ ही इंडियन पब्लिक लाइब्रेरी मूवमेंट बनाने की मंजूरी दे दी। ऐसे में 5 से 14 वर्ष तक के बच्चों को पुस्तकालय आने और पढ़ने के साथ खेलने के लिए  हाथी-घोड़े जैसे तमाम खिलौने आ रहे हैं।
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पुस्तकालय में एक बाल कक्ष और गार्डन बनाया जा रहा है। बच्चों की प्राइमरी की किताबें और शुरुआती दौर में ही कम्प्यूटर की शिक्षा देने का प्रयास किया जाएगा। पुस्तकालय में बच्चों के साथ बुजुर्गों को मुफ्त में कम्प्यूटर की शिक्षा दी जाएगी। शासन पुस्तकालय भवन के सदस्यों को इंटरनेशनल न्यूज देखने के लिए ओपेक कम्प्यूटर भी दे रहा है। सौ रुपये में बनाए जाते हैं सदस्यराजकीय पुस्तकालय में सदस्य बनने के लिए मात्र सौ रुपये शुल्क जमा होता है। सदस्यता समाप्त करते समय शुल्क विभाग की ओर से वापस हो जाता है।

डीएम और सीडीओ की मदद से पुस्तकालय की सूरत बदली जा रही है। कुछ समाजसेवियों ने भी मदद की है।
श्याममूर्ति शुक्ला, अध्यक्ष, राजकीय पुस्तकालय।
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