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Pratapgarh News: फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पांच बार होगी जियोटैगिंग

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अब शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना निर्माण में फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। बेनीफिशियरी लेड कंस्ट्रक्शन (बीएलसी) के तहत बनने वाले आवासों की निगरानी जियो टैगिंग एप से की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 के तहत जहां केवल एक बार जियोटैगिंग होती थी, अब भवन निर्माण के अलग-अलग चरणों में पांच बार जियो टैगिंग अनिवार्य कर दी गई है।
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इसके बाद ही अनुदान की राशि लाभार्थियों के खाते में भेजी जाएगी। लाभार्थियों को कुल 2.50 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है। 1.50 लाख रुपये केंद्र सरकार और एक लाख रुपये रुपये राज्य सरकार देती है। मकान की जियोटैगिंग होने से यह आसानी से पता चल सकेगा कि वास्तव में नया मकान ही बनाया जा रहा है। वहीं साल भर के अंदर निर्माण कार्य पूरा करना होगा।
टैगिंग की प्रगति पर पहली किश्त काम शुरू होने पर एक लाख रुपये जारी की जाएगी। उसके बाद अलग-अलग चरणों में अनुदान की राशि खाते में भेजी जाएगी। यदि लाभार्थी तीन माह में निर्धारित स्तर का निर्माण पूरा नहीं कर पाता है तो समय पर कार्य पूरा करने के लिए नोटिस जारी की जाएगी।
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15 माह में भी निर्माण पूरा न होने पर तीन माह की मोहलत अंतिम नोटिस के रूप में दी जाएगी। 18 माह बाद भी काम अधूरा होने पर लाभार्थी से आवास सरेंडर कराया जाएगा।
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खास बात यह भी है कि पात्र व्यक्ति स्थान भी नहीं बदल सकेगा। जहां जियो टैगिंग होगी। वहीं भवन का निर्माण कराया जाएगा।
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