सूर्य देवता की आराधना का पर्व छठ पूजा 24 अक्तूबर को नहाए-खाए के साथ शुरू होगा। चौक घंटाघर, अजीत नगर समेत शहर के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग बेल्हा देवी मंदिर पर एकत्र होंगे। वहीं पर छठ पूजा होगी। इसके लिए लोगों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। हालांकि अफसरों की उदासीनता के चलते इस बार भी छठ पूजा पर श्रद्धालुओं को गंदगी के बीच पूजा करने पर मजबूर होना पड़ेगा। दरअसल पर्व कल यानी मंगलवार से श्ाुरू होगा लेकिन घाटों पर साफ-सफाई नहीं की गई है। यहां हर तरफ कूड़ा फैला हुआ है।
सई नदी के किनारे हर साल की तरह इस बार भी छठ पूजा परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। इसके लिए लोग तैयारी में भी जुट गए हैं। रविवार को बेल्हा देवी नदी के तट पर गंदगी का अंबार लगा रहा। साफ व्यवस्था न होने से वहां कदम रखना भी मुश्किल हो रहा है। जबकि छठ पूजा के लिए लोगों का आना जाना शुरू हो गया। बेल्हा देवी मंदिर परिसर से लगे तट पर होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर संबंधित विभाग अभी खामोश है। यही वजह है कि तट पर साफ-सफाई का प्रबंध नहीं किया गया। नगर पालिका के ईओ अवधेश यादव ने बताया कि दिवाली के अवकाश के कारण दिक्कत हुई है। सोमवार को हर हाल में वहां सफाई हो जाएगी। प्रकाश से लेकर पेयजल की व्यवस्था भी सुदृढ़ करने का निर्देश संबंधित प्रभारियों को दे दिया गया है।
सई नदी की सफाई करने पहुंचे परशुराम सैनिकः सई नदी के तट की रविवार को साफ करने के लिए परशुराम सेना के जिलाध्यक्ष प्रदीप शुक्ल की अगुवाई में सैनिक पहुंचे। तट के किनारे गंदगी की साफ-सफाई के साथ ही नदी में बह रहे अनुपयोगी सामान को बाहर निकाला। शाम तक सैनिक नदी के तट की सफाई के लिए पसीना बहाते रहे। इस मौके पर रवि राजा, अंकित, अभिषेक, आलोक गर्ग, नीलेश, अतुल सिंह आदि मौजूद रहे।
पति और बेटे के दीर्घायु की कामना को लेकर रखा जाने वाला छठ पूजा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि तक चलता है। 24 अक्तूबर को नहाए-खाए के साथ महिलाएं सुबह स्नान के बाद लौकी की सब्जी और चने की दाल खाएंगीं। दूसरे दिन पंचमी खरना रसियाव रोटी होगा। इसमें शाम को महिलाएं माठी के चावल से गुड़ से खीर बनाएंगी और उसे रोटी से खाएंगीं। इसके सेवन के बाद महिलाओं का 36 घंटे का निर्जल व्रत प्रारंभ हो जाएगा। तीसरे दिन षष्ठी तिथि पर 26 अक्तूबर को व्रतधारी महिलाएं डूबते सूरज को तालाब, नदी आदि में खड़े होकर अर्घ्य देंगी। अगले दिन उगते सूरज को अर्घ्य देंगी। छठ पूजा के लिए बेल्हा देवी घाट पर तीन दिनों तक महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती है।