सई नदी के तट पर इस बार गंगा दशहरा के पर्व का विहंगम नजारा दिखेगा। सई नदी के तट से लेकर मां बेल्हादेवी धाम परिसर तक 11551 दीपों की सतरंगी छटा बिखरेगी। तट पर सई नदी की झांकी का मंचन होगा। 108 इंद्र शंखों की गूंज के बीच महाआरती के स्वर गूंजेंगे। श्री गंगा दशहरा महोत्सव समिति के पदाधिकारी महापर्व की तैयारी को लेकर जोरशोर से जुटे हुए हैं। बेल्हा में गंगा दशहरा पर्व की शुरूआत वर्ष 2007 में हुई थी। उस समय 501 दीप सई तट पर जलाएं गए थे।
इसके बाद हर साल पर्व की भव्यता बढ़ती गई। इस बार 12 जून को गंगा दशहरा का पर्व है। लेकिन तैयारी को लेकर अभी से ही समिति के लोग जुटे हुए है। इस बार गंगा दशहरा को और भी भव्यता देने की कोशिश की जा रही है। सई नदी का तट व बेल्हादेवी धाम परिसर का कोना- कोना दीपों से जगमग होगा। इसके लिए 11551 दीप सजाएं जाएंगे। मां बेल्हादेवी का मंदिर भी आकर्षक लाइटिंग से सजाया जाएगा। श्री गंगा दशहरा महोत्सव समिति के संयोजक समाजसेवी रोशन लाल ऊमरवैश्य व अध्यक्ष मुन्ना भइया ने बताया कि मां की महाआरती 108 शंखों की गूंज के बीच होगा।
श्रद्धालुओं को वितरित करेंगे तुलसी के पौधे
महाआरती में आए श्रद्धालुओं को तुलसी के पौधे वितरित किए जाएंगे। संयोजक समाजसेवी रोशन लाल ऊमरवैश्य ने बताया कि पौध देने के साथ ही श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया जाएगा। उन्हें पौध रोपण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
वाराणसी आ रहा इंद्र शंख, मायानगरी से मां सई का पोशाक
मां आदि गंगा सई के तट पर गंगा दशहरा के पर्व पर महाआरती के दौरान इंद्र शंख की गूंज होगी। वाराणसी से इंद्र शंख को मंगवाया जा रहा है, जबकि माया नगरी से मां सई नदी का पोशाक मंगवाया जा रहा है। पर्व को पूरी भव्यता प्रदान करने का प्रयास है।