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Pratapgarh News: गेम का नशा...चिड़चिड़ापन और जिद्दीपन, कहीं बच्चा गेम का शिकार तो नहीं

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ऑनलाइन गेमिंग के फेर में वर्चुअल हीरो बनने का सपना देख रहे बच्चे बीमार बन रहे हैं। इंटरनेट पर थ्रिलर ऑनलाइन गेम्स बच्चों के दिलोदिमाग पर हावी हो रहा है। वह चिड़चिड़े और जिद्दी हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के साइकोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार के पास भी इस तरह के मामले पहुंच रहे हैं।
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साइकोलॉजिस्ट डॉ. अमित ने कहा, ऐसा नहीं कि बड़े बच्चों को ही गेमिंग की लत है, बल्कि छोटे बच्चों को भी मोबाइल या अन्य डिजिटल गैजेट्स यूज करने के आदी हो गए हैं। पिछले एक साल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जो जिद्दी व चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। ज्यादातर बच्चे बैटलग्राउंड गेम्स से आक्रामक हो रहे हैं। एक-दूसरे को हराने की होड़ में बच्चे रात-रात भर कंबल के अंदर गेम खेल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चों में डोपामिन हारमोन के कारण गेम के आदी हो जाते हैं। यही गेमिंग एडिक्शन बच्चों के विकास में बाधा बनता है। वर्चुअल वर्ल्ड के हीरो बनने के चक्कर में रीयल लाइफ से दूर हो जाते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब बच्चों को गेम खेलने से रोकने पर वह लड़ाई करने पर उतर आते हैं।
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करीब दो साल पहले दहिलामऊ के दो किशोरों को मां ने ऑनलाइन गेम खेलने से रोका तो वह घर छोड़कर भाग निकले। गनीमत रही कि जीआरपी ने जंक्शन से दोनों को पकड़कर परिजनों के हवाले किया था।
गेम से बच्चों को बचाने की अपनाएं सलाह
एमडीपीजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रथमेश पांडेय का कहना है कि बच्चों को कम फोन चलाने दें। मोबाइल से गेम को अनइंस्टॉल करते हुए उनसे दोस्ताना ताल्लुकात रखें। उन्हें आउटडोर गेम खेलने के लिए भेजें। अपनी अपेक्षाएं न थोपे, समझाने की कोशिश करें। उनके व्यवहार में बदलाव न आ रहा हो तो साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। घर में लगे वाई-फाई की स्पीड कम रखें।
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