िजले के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने शासन की रोक के बावजूद 29 मदरसों को मान्यता दे दी है। इसमें 19 मदरसे तहतानिया (कक्षा एक से पांच तक) और 10 मदरसे आलिया (हाईस्कूल) स्तर के हैं। शासन की रोक के बावजूद विभाग ने इन मदरसों को मान्यता देकर व्यापक खेल किया है। अधिकांश मदरसे ऐसे हैं, जो टीन और छप्पर में चल रहे हैं, तो कुछ मदरसे ऐसे हैं जो कागज पर चल रहे हैं।
बागपत जिले में फर्जी मदरसों को मान्यता देने में फंसे जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बेल्हा में भी 29 मदरसों को मान्यता बांट दी है। इसमें 19 मदरसे तहतानिया (कक्षा एक से पांच तक) और 10 मदरसे आलिया (हाईस्कूल) स्तर के हैं। कक्षा एक से पांच तक की मान्यता देने का अधिकार अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को प्रदान किया गया था, मगर शासन ने 22 जुलाई 2016 को रोक लगा दी। इसके बावजूद 19 अक्तूबर 2016 को 19 मदरसों को मान्यता दे दी गई। आलिया (हाईस्कूल) स्तर की मान्यता जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की संस्तुति पर सब रजिस्ट्रार लखनऊ देते हैं। विभागीय अधिकारी ने सब रजिस्ट्रार को गुमराह करके मान्यता दिलाने की संस्तुति कर दी। जबकि वास्तविकता तो यह है कि जिन मदरसों को मान्यता दी गई है, उनमें से गिने-चुने मदरसे ही मानक पर खरे उतर रहे हैं। मगर अधिकांश मदरसे ऐसे हैं जो अस्तित्व में ही नहीं है। तहतानियां स्तर की मान्यता बांटने में व्यापक लापरवाही बरती गई है।
यह वही अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सिंह प्रताप देव हैं, जिन्होंने बागपत में तैनाती के दौरान 23 में से 18 फर्जी मदरसों को मान्यता बांट दी थी। डीएम की जांच के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिले में भी अगर मान्यता मिलने वाले मदरसों की जांच कराई जाय, तो इनमें से अधिकांश कागज पर चलते हुए मिलेंगे। फिलहाल इसका फैसला जिला प्रशासन को करना है।