फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंसेफ्लाइटिस की चपेट में आने से चार लोगों की हालत बिगड़ी, एसआरएन में भर्ती 

Fri, 29 Mar 2019 01:27 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
विज्ञापन
fever
विज्ञापन
 एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम जैसी बीमारी की चपेट में आने से लालगंज और कुंडा क्षेत्र के चार लोगों की हालत बिगड़ गई है। उन्हें एसआरएन में भर्ती कराया गया है। मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। अफसर दवा का छिड़काव करने के लिए मरीजों के गांव पहुंच गए। 
विज्ञापन


कालाकांकर ब्लाक के वाजिदपुर निवासी आरआर तिवारी (67) पुत्र एसएन तिवारी, वारी गांव निवासी जगरनाथ सरोज (67), सांगीपुर ब्लाक के पूरेराज राखी निवासी विधि सिंह (16) पुत्री सुनील व लक्ष्मणपुर के हंडौर निवासी रामा त्रिपाठी (55) पत्नी केसरी नंदन एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम की चपेट में आ गए हैं। पहले परिजनों ने आसपास के चिकित्सकों से इलाज कराया। हालत में सुधार न होने पर एसआरएन लेकर पहुंचे।

मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद चारों लोगों को एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम की पुष्टि हुई। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने चारों मरीजों की रिपोर्ट सीएमओ के पास भेजी। इस पर सीएमओ ने तत्काल जिला मलेरिया अधिकारी को टीम के साथ मरीजों के गांव भेजकर दवा का छिड़काव कराया। जिला अस्पताल के फिजिशियन मनोज खत्री ने बताया कि गर्मी के मौसम में कई बीमारियां पैदा हो जाती हैं।
विज्ञापन


इस समय बीमारियों से सावधान रहने की जरूरत होती है। अगर जरा-सी भी चूक हुई तो जान तक जाने का खतरा रहता है। ऐसी ही बीमारी है इंसेफ्लाइटिस। इसका पूरा नाम %एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम% है। इसे दिमागी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। यह जापानी इंसेफ्लाइटिस नामक वायरस से होने वाली बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से होती है। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट आने के बाद मरीजों के घर और उसके आसपास दवा का छिड़काव किया जा रहा है। 

कैसे फैलती है बीमारी  
यह बीमारी ज्यादा गर्मी या नमी में अधिक फैलती है। इसके कीटाणु सांस व मुंह से शरीर में प्रवेश करते हैं। जिन जगहों पर गंदगी रहती है, वहां तेजी से यह बीमारी फैलने लगती है। इसके साथ ही खाना बनाने में सफाई की कमी, गंदा पानी पीने और खाने से पहले हाथ साफ ना करने से इंफेक्शन के कारण बीमारी फैलती जाती है। ग्रामीण इलाकों में इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है।

लक्षण
- अचानक तेज बुखार आना और लगातार बने रहना
- शरीर के अंगों में जकड़न, चमकी व ऐंठन होना
- मरीज का सुस्त व बेहोश हो जाना
- शरीर सुन्न पड़ जाना व कोई हरकत ना होना

बीमारी की पहचान होने पर क्या करें 
 तेज बुखार होने पर शरीर को साफ व ताजे पानी से पोछें और हवा करते रहें, ताकि बुखार कम हो सके।
 जब मरीज बेहोश ना हो तो उसे साफ पानी में ओआरएस का घोल बनाकर पिलाएं।
 बेहोश होने पर मरीज को छाया व हवा वाली जगह पर लेटाएं।
 डॉक्टर से संपर्क करें व उनकी सलाह मानें

क्या न करें
- मरीज को कंबल व गर्म कपड़े ना लपेटें। 
- मरीज की नाक बंद ना करें।
- जब मरीज बेहोश हो तो उसके मुंह में कुछ ना डालें
- गर्दन को झुकाकर ना रखें।
- बाबा व तांत्रिक के पास ना जाएं। 
- पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें।
- मच्छरों से बचाव करें। जब सोने के लिए जाएं तो मच्छरदानी का प्रयोग करें। 
- अपने आसपास का वातावरण साफ रखें। घर के बाहर अगर झाड़ियां उगी हों या गंदा पानी जमा हो तो उसे तुरंत साफ करें। सूती कपड़ों का इस्तेमाल करें और शरीर को पूरा ढककर रखें।
- खुले मे शौच ना जाएं।
- खाना बनाने और खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।

चार लोग एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम की चपेट में आ गए हैं। सभी की हालत सामान्य है। मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। टीम को भेजकर दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। 
विज्ञापन

एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें