शनिवार को आसमान में छाए रहे बादल। संवाद
जनपद में बीते तीन साल में औसत से कम बरसात दर्ज की गई। जिस कारण किसानों को निजी नलकूपाें के सहारे खेती करनी पड़ रही है। जिले में सालभर की औसत वर्षा का मानक 997.7 मिमी है। 2023 से अब तक बारिश औसत आंकड़ा भी नहीं छू सकी है।
इस साल जुलाई में 305 के सापेक्ष 300 मिमी ही बारिश हुई। जून में महज 160 के सापेक्ष महज 48 मिमी ही बरसात हुई। जबकि औसत वर्षा का आंकड़ा करीब 500 मिमी था। कम बारिश होने से किसान धान की रोपाई से लेकर सिंचाई तक अधिक पैसे खर्च कर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी अशोक यादव ने बताया कि इस साल जनपद में 1.33 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई है। बारिश कम होने के कारण 50 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई किसानों ने जुलाई के अंत तक की। ऐसे में पैदावार पर असर पड़ सकता है। बीते पांच साल में जिले में खेती का रकबा करीब 20 हजार हेक्टेयर तक बढ़ा है।
खेत में पानी पर खर्च करना पड़ रहा पैसा
सदर के बबुरहा गांव निवासी मुकेश श्रीवास्तव ने दो बीघे में धान की रोपाई कराई है। नर्सरी से लेकर रोपाई तक उन्होंने पानी पर दो हजार रुपये खर्च किए। सतइसा के किसान शिवम सिंह ने चार बीघा धान लगवाया है। नर्सरी व धान की रोपाई में उन्होंने करीब 25 सौ रुपये पानी के लिए खर्च किए।
वर्ष- औसत वर्षा- बारिश हुई- कितनी कम हुई वर्षा
2023-997.7 मिमी-558 मिमी-439 मिमी कम वर्षा
2024-997.7 मिमी-951 मिमी-46.30 मिमी कम वर्षा
2025-997.7 मिमी-378 मिमी- 619 मिमी कम वर्षा (जुलाई तक)
(कृषि विभाग से प्राप्त बारिश के आंकड़े)