2009 में शुरू हुआ सीवर लाइन का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ। जबकि निर्माण कार्य दिसंबर माह में ही पूरा हो जाना था। पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के प्रयास से सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने करीब साढ़े 18 करोड़ की लागत से शहरियों को सीवरेज योजना का तोहफा मिला था।
बीच में कुछ अड़चनों के बाद वर्ष 2009 में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। शहर की सड़कों को खोदकर सीवर लाइन बिछाने का काम कच्छप गति से जल निगम विभाग की देखरेख में चलता रहा। दिसंबर वर्ष 2014 में सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा हो जाना था लेकिन तय समय भी व्यतीत हो गया। इसके बाद भी शहरियों को सीवरेज प्लांट योजना से जोड़ा नहीं सका। शासन ने इसके लिए दो किश्तों में 18.78 करोड़ रुपए की धनराशि भी जारी कर चुकी है। पांच वर्ष से अधिक समय बीतने के चलते शहरियों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
शहर में सीवर लाइन की खोदाई के दौरान तीन लोगों को अपनी जान भी देनी पड़ी। शहीद उद्यान के करीब खोदे गए गड्ढे के करीब एक बुजुर्ग गिरने से बचने की कोशिश के दौरान ट्रक की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा गया। दूसरी घटना राजकीय इंटर कालेज के करीब हुई थी। रात के अंधेरे में कोहरे के के चलते बाइक सवार इंजीनियरिंग का छात्र गड्ढे में गिर गया था। इससे उसकी भी मौत हो गई। जबकि तीसरी घटना लोनिवि कार्यालय के समीप हुई। जहां खोदाई के दौरान छत्तीसगढ़ के मजदूर की मौत हो गई। अनगिनत लोग सीवर लाइन के खोदे गए गड्ढों में गिरकर चुटहिल भी हुए।
शहर के लोगों को सीवरेज योजना का लाभी समय सीमा पूरा होने के बाद भी नहीं मिला। इससे शहरियों में गुस्सा है। वे इसके लिए विभाग और कार्यदायी संस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। शहर के व्यापारी मंजीत सिंह गोविंद का कहना है कि विलंब के लिए अधिकारी दोषी हैं। अनिल अग्रवाल ने भी कहा कि दोषी लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। व्यापारी अमित केसरवानी ने कहाकि सरकार की योजनाओं को पूरा कराना अधिकारियों का काम है। मनोज पांडेय ने बताया कि काम नहीं होने से सई नदी प्रदूषित हो रही है।