प्रतापगढ़। शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल में हुए बवाल के बाद पांच घंटे तक मरीज तड़पते रहे। इमरजेंसी में भर्ती पांच मरीजों ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उनका इलाज नहीं किया। इमरजेंसी सेवा ठप रही। उधर, अस्पताल आने वाले कई गंभीर मरीजों को भी परेशान होना पड़ा। परिजन उन्हें लेकर निजी अस्पतालों में जा रहे थे, लेकिन कोविड जांच न होने के कारण उन्हें वहां भी भर्ती नहीं किया जा रहा था। सांस लेने में तकलीफ और ऑक्सीजन लेवल गिरने से इलाज के लिए मेडिकल और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों की जिंदगी भी खतरे में पड़ गई थी। कई मरीजों को समय से ऑक्सीजन और दवाएं नहीं मिल सकीं। डॉक्टरों और कर्मचारियों की हड़ताल से अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती गंभीर मरीजों के तीमारदारों की सांसें अटकी रहीं।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती महिला के इलाज को लेकर हुए बवाल की जानकारी मिलने के बाद सुबह सभी अस्पताल के सभी कर्मचारी और डाक्टर इमरजेंसी गेट पर पहुंच गए। जिन डॉक्टरों और कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं थी, वह भी पहुंच गए। स्वास्थ्य कर्मचारियों से हुई मारपीट को लेकर सभी आक्रोशित थे। बुधवार रात भी मरीज के इलाज को लेकर इमरजेंसी में एक डाक्टर और लैब टेक्नीशियन की पिटाई कर दी गई थी। उस समय तो स्वास्थ्यकर्मी किसी तरह मान गए थे, लेकिन शुक्रवार सुबह हुई घटना के बाद उनका धैर्य जवाब दे गया। इमरजेंसी गेट में ताला बंद करने के बाद डाक्टर और कर्मचारी वहीं धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों और कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से जिला अस्पताल में हाहाकार मच गया। इमरजेंसी में भर्ती पांच मरीजों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
धरने पर बैठे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने नए मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर दिया। इससे सांस लेने में तकलीफ और ऑक्सीजन लेवल कम होने से परेशान मरीज तड़पते रहे। काफी देर बाद भी मदद न मिलते देख परिजन मरीजों को लेकर निजी अस्पताल जाने लगे, लेकिन कोविड रिपोर्ट न होने के कारण वहां भी उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा था। इधर, जनरल वार्ड, मेडिकल वार्ड और सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज भी बंद हो गया। सभी डाक्टर और कर्मचारी वार्डों से बाहर निकल गए थे। मरीज बेड पर तड़पते रहे। किसी को समय पर दवा नहीं मिली तो कोई ऑक्सीजन न मिलने के कारण तड़पता रहा। करीब पांच घंटे तक उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। हड़ताल खत्म होने के बाद मरीजों को राहत मिली और उनके तीमारदारों की जान में जान आई।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी में हुए बवाल के बाद डाक्टर और कर्मचारी धरने पर जरूर बैठे थे, लेकिन किसी भी मरीज को कोई परेशानी नहीं होने दी गई। अस्पताल में आने वाले कोरोना के संदिग्ध मरीजों की मौतें तो हर दिन हो रही हैं।
डा. पीपी पांडेय, सीएमएस, जिला अस्पताल
विधायक की तर्ज पर हो डॉक्टरों की सुरक्षा
घटना के बाद जिला अस्पताल में धरने पर बैठे चिकित्सक आए दिन होने वाली मारपीट की घटनाओं को लेकर नाराज थे। नगर कोतवाल ने फोर्स न होने की बात कही तो डाक्टर भड़क गए। कहा कि अस्पताल में बनी पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों से कुछ नहीं होने वाला। चिकित्सक मनोज खत्री ने कहा कि विधायकों की सुरक्षा कैसे की जाती है। उसी तर्ज पर डाक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा की जाए। अन्यथा वे लोग किसी का उपचार नहीं करेंगे।
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फैजाबाद ले जाते समय पूर्व डीजीसी की पत्नी का निधन
पूर्व डीजीसी शचींद्र प्रताप सिंह की पत्नी को परिजन उपचार के लिए लेकर फैजाबाद जा रहे थे, मगर वहां पहुंचने से पहले ही ऑक्सीजन समाप्त होने के कारण उनकी मौत हो गई। यह खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। पूर्व डीजीसी ने आरोप लगाया कि रात में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उनकी पत्नी की उचित देखभाल नहीं की। आक्सीजन लेवल भी सही से चेक नहीं किया। रेफर होने के बाद भी उन्हें इमरजेंसी वार्ड में जबरन रोके रखा गया। पुलिसकर्मी भी मूकदर्शक बने रहे। डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही ने उनकी पत्नी की जान ले ली। मरीज का बेहतर इलाज करने की बात पर कर्मचारी मारपीट पर उतारू हो गए।