जिले में बड़ी घटनाओं के बाद ही प्रशासन को कार्रवाई की याद आती है। मगर दिन बीतने के साथ ही अधिकारी सब कुछ भूल जाते हैं और सब कुछ पहले की तरह चलने लगता है। जीजीआईसी के पीछे मकान के गोदाम में लगी आग के बाद एसडीएम सदर जेपी मिश्र ने दावा किया था कि शहरियों की जान खतरे में डालने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके लिए कई लोगों को नोटिस देने की भी बात कही गई थी, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं दिखा।
करीब ढाई माह पूर्व जीजीआईसी के पीछे रुई व प्लास्टिक के थोक कारोबारी के मकान में बने गोदाम में भीषण आग लग गई थी। इससे आसपास के लोगों की जान पर भी खतरा मंडराने लगा था। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया था। व्यापारी ने अपने आवास में ही गोदाम बनाया था। बिना अनुुमति के रिहायशी आवास को व्यवसाय के लिए प्रयोग कर दूसरों की जिदंगी जोखिम में डालने के मामले को प्रशासन ने बड़ा गंभीरता से लिया। अमर उजाला ने भी शहरियों की जिंदगी के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।
जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीएम सदर ने दर्जन भर से अधिक कारोबारियों को चिह्नित करते हुए नोटिस भेजने की बात कही थी। चेेताया था कि यदि मकानों का प्रयोग व्यवसाय में करते मिलेंगे तो सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन ढाई माह बाद भी ऐसी कोई कार्रवाई प्रशासन ने नहीं की। अब तो लोग कहने लगे है कि प्रशासन केवल घटनाओं के बाद ही चेतता है। कुछ दिन बीतने के बाद सबकुछ भुला देता है। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद मानक के विपरीत मिलने वाले होटलों व दूसरे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करने वाले अधिकारी अपने वादे पर कितना खरा उतरते हैं।