जिले के कर्मचारियों की उम्मीदों पर आम बजट ने पानी फेर दिया है। आयकर की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग से शिक्षकों और कर्मचारियों को यह उम्मीद थी कि सरकार इस पर सकारात्मक फैसला लेगी, मगर वित्त मंत्री के पिटारे से कर्मचारियों के राहत के लिए कोई घोषणा नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में मायूसी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट ने पेट्रोल और डीजल में एक्साइज ड्यूटी दो रुपये घटाकर आम नागरिकों को थोड़ी राहत अवश्य दी है।
वर्ष 2018-19 के आम बजट ने शिक्षकों और कर्मचारियों को निराश किया है। आयकर सीमा बढ़ाकर पांच लाख करने की मांग करने वाले कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कर्मचारी नेताओं का मानना था कि पांच लाख की मांग अगर नहीं पूरी होती है तो 3.50 लाख सीमा निश्चित की जा सकती है। मगर आयकर की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं होने से शिक्षकों और कर्मचारियों को निराश होना पड़ा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल और डीजल में एक्साइज ड्यूटी दो रुपये घटाकर आम नागरिकों को थोड़ी राहत अवश्य दी है। एक्साइज ड्यूटी घटाने से पेट्रोल और डीजल के दामों में दो रुपये की कमी आएगी। फिलहाल इस राहत को कर्मचारी और शिक्षक मामूली मान रहे हैं। इस राहत से आम आदमी को लाभ होगा।
सरकार ने उम्मीदों पर फेरा पानी
वित्तमंत्री ने शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। आयकर की सीमा बढ़ाने का आश्वासन केंद्र सरकार ने दिया था, मगर शिक्षकों और कर्मचारियों को झुनझुना दिया है। दु:खद यह है कि सीनियर सिटीजन को भी कोई राहत नहीं दी है।
रामचंद्र सिंह, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, माध्यमिक शिक्षक संघ।
मोदी सरकार से नहीं थी ऐसी उम्मीद
आम बजट में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि कर्मचारियों को किसी प्रकार की कोई राहत नहीं दी गई है। न तो आयकर छूट की सीमा बढ़ाई गई और न ही कर्मचारियों को कोई राहत प्रदान की गई। कर्मचारियों के लिए यह बजट निराशाजनक था।
वकील अहमद, जिलामंत्री, राज्य कर्मचारी महासंघ
डीजल, पेट्रोल का दाम घटाने से नहीं मिलेगी राहत
केंद्र सरकार ने डीजल,पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने से कर्मचारियों को कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। डीजल और पेट्रोल के दामों में कमी करके बडे़ अफसरों और नेताओं को खुश करने का प्रयास किया गया है।
रामप्रकाश त्रिपाठी, अध्यक्ष यूपी मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन
शिक्षक और कर्मचारी विरोधी बजट
केंद्र सरकार शिक्षक और कर्मचारी विरोधी है। आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग काफी पहले से हो रही थी। मगर सरकार ने एक रुपये की बढ़ोतरी न करके बड़ा झटका दिया है। सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी।
राजेश त्रिपाठी, संयोजक, शिक्षक संघर्ष समिति
बेरोजगारों को गुमराह कर रही सरकार
केंद्र सरकार ने चार साल में बेरोजगारों की याद नहीं आई, चुनावी वर्ष में बेरोजगारों को गुमराह करने का प्रयास किया है। जब कर्मचारियों को कोई राहत नहीं दे सकते हैं तो बेरोजगार और आम आदमी को पिटारा खोलने का दावा सिर्फ कपोल कल्पित है।
करुणेश प्रताप सिंह, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
शिक्षा सुधार की पहल सराहनीय
पठन-पाठन और भवन की दशा में सुधार की पहल बेहद सराहनीय है। इससे स्कूलों से निकलने वाले बच्चों को रोजगार मिलेगा। हालांकि आम बजट कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए निराशाजनक है।
अनिल सिंह, जिलाध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ
युवाओं का बढ़ा उत्साह, गरीबी होगी दूर
मोदी बजट से युवाओं, किसानों में उत्साह का संचार हुआ है। आम बजट में गरीबी मिटाने, खेती- किसानी पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इससे गांव के लोगों का उत्साह बढे़गा और देश तरक्की की राह पर जाएगा।
भूपेश श्रीवास्तव, मंत्री, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ संडवा चंद्रिका
गांव की महिलाओं को मिली राहत, अब गैस पर बनाएंगी खाना
मोदी सरकार ने आम बजट में गांव की उन महिलाओं का ख्याल रखा है, जो दिनभर मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण कर रही हैं। इन महिलाओं को उज्ज्वला गैस योजना के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन देने का फैसला बहुत ही सराहनीय है। बजट में शिक्षिकाओं के लिए कोई राहत नहीं देने से मायूसी अवश्य है।
गरिमा श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, जीजीआईसी