मोदी सरकार के बजट में शहरी महिलाओं के लिए कोई राहत नहीं मिलने से जहां उनमें नाराजगी है, वहीं गांव की महिलाओं को गैस कनेक्शन फ्री में मिलने की खुशी है। महिलाओं का कहना है कि सरकार के बजट में कुछ खास नहीं है। मगर उन महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है जो आज भी चूल्हे पर रोटी बनाती हैं।
केंद्र सरकार के अंतिम आम बजट में गृहणियों को भी राहत मिलने की उम्मीद थी, मगर बजट में कहीं भी रसोई के लिए कोई राहत की घोषणा नहीं होने पर मायूस होना पड़ा। शहर के करनपुर निवासी रेखा शुक्ला ने कहा कि शहर की महिलाओं को लालीपॉप दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि उज्ज्वला योजना के तहत आठ करोड़ उन महिलाओं को गैस का कनेक्शन दिया जाएगा, जो अभी भी खाना बनाने के लिए चूल्हा फूंकती हैं।
बाबागंज निवासी बबली सिंह कहती हैं कि चुनावी बजट होने के कारण हम लोगों को यह उम्मीद थी कि रसोई गैस के साथ ही खान-पान की सामग्री में कमी आएगी। मगर सरकार ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अजीतनगर निवासी प्रज्ञा खरे कहती हैं कि मोदी सरकार ने अंतिम बजट में भी महिलाओं को छला है। बेटी बचाओ, बेटी पढाओ का नारा देने वाली सरकार ने बालिका शिक्षा और महिलाओं के लिए बजट में कुछ भी नहीं दिया है।
मीराभवन निवासी सरिता शुक्ला ने कहा कि वित्त मंत्री के पिटारे में महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं है। चुनाव आने पर महिलाओं के उत्थान की बातें की जाती हैं, मगर सत्ता में काबिज होते ही लोग भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का अंतिम बजट होने के कारण महिलाओं को रसोई की सामग्री और महिला श्रृंगार की वस्तुएं सस्ती होने की उम्मीद थी, मगर ऐसा नहीं हो सका।