योगी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी का प्रमाणपत्र बांटने के लिए साढ़े बाइस लाख रुपये फूंकने की तैयारी की है। यह रुपये पंडाल लगवाने और वीआईपी के सेवा सत्कार में खर्च होंगे। वाहवाही भुनाने में कोई कोर कसर न रह जाए, इसके लिए मुख्यालय पर कार्यक्रम कराने के बाद गांव में भी भव्य कार्यक्रम कराकर प्रमाणपत्र बांटने की तैयारी की जा रही है।
योगी सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाने की तैयारी की है। पहले चरण में शामिल जिले के 14,893 किसानों को कर्जमाफी का प्रमाणपत्र बांटने के लिए शासन ने जिले को 22.50 लाख रुपये का बजट दिया है। शासन ने पत्र भेजकर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऋणमाफी का प्रमाणपत्र चुपके से नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालयों में पर कार्यक्रम का आयोजन करके वितरित किया जाए। जिला मुख्यालय के लिए 10 लाख रुपये और तहसीलों के लिए 12.50 लाख रुपये दिए गए हैं। इस प्रकार प्रत्येक तहसील में होने वाले कार्यक्रम में 2.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यालय पर प्रभारी मंत्री स्वाती सिंह के हाथों किसानों को प्रमाणपत्र वितरित किया जाना है, जबकि तहसीलों में मंत्री और विधायकों के माध्यम से वितरित किया जाएगा।
पांच सितंबर को होने वाले कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने के लिए अधिकारियों ने पांच हजार किसानों के बैठने और लंच पैकेट की व्यवस्था की है। साथ ही वीआईपी को खुश करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। भारी भरकम पंडाल में दस ब्लाक बनाए जाएंगे। एक ब्लाक में पांच सौ लाभार्थियों के बैठने की व्यवस्था होगी। किसानों को प्रमाणपत्र प्रदान करने के साथ ही उन्हें लंच पैकेट और पानी की बोतले भी दी जाएंगी। फिलहाल अभी जो धनराशि शासन ने जारी की है, वह पहले चरण के लाभार्थियों को बांटने के लिए हैं, अभी दूसरे और तीसरे चरण में भी ऋणमाफी की सूची जारी होनी है, उनका प्रमाणपत्र वितरित करने में इससे अधिक धनराशि खर्च होगी।
मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण करते ही सरकार ने किसानों का कर्जामाफ करने की घोषणा की थी। योगी सरकार के इस फैसले से किसान बेहद उत्साहित भी है। मुख्यमंत्री की पहल और मुद्दा सीधे किसान से जुड़ा होने के कारण इसे भुुनाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसीलिए प्रमाणपत्रों को बांटने के लिए इतना बड़ा ताना-बाना बुना गया है।