बुधवार की शाम ओले गिरने से गेहूं, चना, मटर, आलू, अरहर और सरसों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि ओलावृष्टि का कहर कुछ ही इलाकों के किसानों को झेलना पड़ा है। ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान का जायजा लेने के लिए कृषि विभाग ने पांच टीमों का गठन किया है। कृषि विभाग ने ऐसे किसानों से भी क्लेम करने को कहा है, जिन किसानों की पचास प्रतिशत फसल नष्ट हुई है।
जिले में बुधवार की शाम तेज बरसात के साथ ओले पड़ने से गेहूं, चना, मटर, आलू, अरहर और सरसों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान सरसों, चना और मटर की फसल को हुआ है। सदर, मानधाता, शिवगढ़, बेलखरनाथधाम, मंगरौरा इलाकों में ओले पडने से सरसों के पेड़ बीच से ही टूटकर गिर पड़े हैं, जबकि मटर और चना के पौधों पर जहां ओले गिरे वहीं से कट गए।
अरहर और आलू की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसल पर ओलावृष्टि का कोई खास नुकसान देखने को नहीं मिला। फिलहाल कृषि विभाग ओलावृष्टि से किसानों की फसल के हुए नुकसान का जायजा लेेने के लिए टीम गठित किया है। फिलहाल जिन किसानों की फसल का नुकसान 50 प्रतिशत से अधिक हुआ है, वह बीमा कंपनी से क्लेम कर सकते हैं।
सरसों के नुकसान पर नहीं मिलेगी राहत राशि
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सरसों की फसल को बीमा क्षेत्र की परिधि से बाहर रखा गया है। इसलिए सरसों की फसल का कोई क्लेम नहीं मिलेगा। अन्य फसलों के 50 प्रतिशत नुकसान बीमा कंपनी से मुआवजा मिलेगा। हालांकि ीइसके लिए किसानों को 48 घंटे के अंदर सूचना देना आवश्यक होता है।
प्रीमियम चुकाने वालों को ही मिलेगा लाभ
ओलावृष्टि से किसानों की नष्ट हुई फसल का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी फसल बीमित है और जिन्होंने प्रीमियम का भुगतान किया है। अगर फसल बीमित नहीं है तो नुकसान की भरपाई होना संभव नहीं है।
ओलावृष्टि से सबसे अधिक सरसों की फसल का नुकसान हुआ है। सरसों की फसल नष्ट होने पर कोई मुआवजा नहीं मिलता है, ऐसा इसलिए होता है कि सरसों को बीमित क्षेत्र से बाहर रखा गया है। अगर किसी किसान के फसल का नुकसान पचास प्रतिशत से अधिक हुई है, तो वह विभाग में क्लेम कर सकता है। डॉ. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी