आईआईटी कानपुर और विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में जिले के आंवला किसानों की आत्मनिर्भरता विकसित करने के लिए जिला विज्ञान क्लब द्वारा गोड़े और शिवराम इंटर कॉलेज कुसहा में लगाई कृषि प्रदर्शनी में शामिल कृषि यंत्रों को किसानों ने पहली नजर में फेल कर दिया। तमाम खामियाें के चलते ये मशीनें बाजार की दौड़ में शामिल होने से पहले ही बाहर हो गईं।
किसानों का कहना था कि इन मशीनों के उपयोग से उनको नुकसान हो सकता है। आंवला गोदने, लरछा निकालने, बेल मुरब्बा व बेल कटिंग की मशीनों की बनावट ऐसी थी जिससे आंवला किसानों को फायदा कम था। बल्कि इससे नुकसान था। किसानों ने प्रदर्शनी में शामिल वैज्ञानिकों से मशीन को नए तरीके से बनाने का सुझाव भी दिया ताकि भविष्य में वे उसका उपयोगी बेहतरी के लिये कर सकें। वैज्ञानिकों ने किसानों के सुझाव का माना। मशीनों में बदलाव करने को कहा। प्रदर्शनी में समन्वयक डॉ. विनोद शुक्ल, मो.अनाम, डॉ.राजेश चतुर्वेदी, श्रीमती रीता सिंह, आशुतोष तिवारी व समूूूूह की महिलाओं शामिल रहीं। समन्वयक विनोद शुक्ल ने बताया कि डेमो के लिये ये मशीनें सत्कार ग्रामोद्योग केंद्र पर रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि बेल के अलावा बाकी मशीनों के बदलाव के सुझाव किसानों ने दिए हैं। उन्होंने मशीनों से नुकसान होने की बात कही है।