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कर्मचारी रखने के नाम पर भी किया फर्जीवाड़ा

Thu, 09 Aug 2018 11:57 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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शहर में निराश्रित महिलाओं को सहारा देने वाले आश्रय गृह में सबकुछ रजिस्टर पर ही चलता था। अफसरों की लापरवाही के कारण संचालक मनमानी कर शासन की धनराशि डकारते रहे। आश्रय गृह पर काम करने के लिए पांच कर्मचारियों की तैनाती होती थी, लेकिन कर्मचारी केवल जांच के समय ही सामने आते थे। कर्मचारियों को दो तीन साल में बदल दिया जाता था।
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महिला आश्रय गृह में अधीक्षिका, काउंसलर, क्लर्क रसोइयां और चौकीदार काम करने के लिए केवल कागजों में रखे जाते थे। जिन्हें हर माह पारिश्रमिक संस्था की ओर से देने का प्रावधान है। अचलपुर स्थित मैक्सन ग्रामोद्योग द्वारा संचालित आश्रय गृह में केवल काउंसलर साजिदा अब्बास निवासी जौनपुर ही मिलीं। जो अपनी बेटी के साथ रहती हैं। अधीक्षिका अमेठी की रहने वाली नेहा परवीन दो माह पहले आई थी। दानबहादुर क्लर्क हैं और रामराम वर्मा चौकीदार है। नाजिया सफाई के साथ ही खाना बनाने का काम करती है। यहां चार महिलाओं के साथ नौ बच्चे भी रहते मिले। जागृति महिला आश्रय गृह में अधीक्षिका मिली, लेकिन अन्य कर्मचारी सामने नहीं आए। लोगों की मानें तो संस्था के रजिस्टर में ही कर्मचारी काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर बुला लिया जाता था। फिलहाल हर बिंदुओं पर जांच टीम रिपोर्ट तैयार करती रही।

कौशल विकास से जुड़ी हैं संस्थाएं, नहीं मिलता था कोई प्रशिक्षण
स्वाधार महिला आश्रय केंद्र का संचालन करने वाली संस्थाएं कौशल विकास से जुड़ी हुई हैं। महिला आश्रय गृह में रहने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण भी देना होता था। हालांकि जांच में यह बात भी सामने आई कि महिलाओं को कोई प्रशिक्षण देना तो दूर आश्रय गृह में प्रशिक्षण का कोई संसाधन तक नहीं मिला। महिलाओं को सिलाई कढ़ाई व बुनाई सीखने के लिए संस्था की ओर से कोई व्यवस्था नही की गई थी। संस्था के कार्यों का ब्योरा मैनुअल ही होता था। आनलाइन काम करने से संस्था के लोग बचते थे।
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साहब हमारी कोई गलती नहीं, हम लोग कहां जाएं
अचलपुर स्थित स्वाधार महिला आश्रय गृह पर रहने वाली काउंसलर साजिदा सब्बाग के साथ ही दूसरी महिलाएं जांच टीम के सामने बोल पड़ी कि घरवालों ने उन्हें छोड़ दिया है। अब वह कहां जाएंगीं, काउंसलर ने बताया कि साहब संचालक के कहने पर वह रजिस्टर में फर्जी नाम दर्ज कर देती थीं। सभी का फर्जी नाम से रजिस्ट्रेशन भी होता था। संचालक इंद्रजीत सिंह कभी कभार आता और महिलाओं के साथ खाने पीने की फोटो खींचकर चला जाता था। महिलाओं ने बताया कि उनका कोई शोषण नहीं करता था। सभासद आशुतोष सिंह से प्रमाण पत्र देने के लिए पांच हजार रुपये भी दे रहा था।

एफआईआर न कार्रवाई, शासन को भेजी रिपोर्ट
स्वाधार महिला आश्रय गृह में मिलीं खामियों के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नही की गई। न तो प्रशासन ने एफआईआर कराई। जिला प्रशासन ने महिला आश्रय के फर्जीवाड़े की रिपोर्ट शासन के साथ ही महिला कल्याण विभाग को भेजी है। कार्रवाई के लिए वहां से सुझाव भी मांगा है। फिलहाल वित्तीय खामियां मिलने के बाद भी संस्थाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर लोग हतप्रभ हैं।
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