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Pratapgarh News: तैयारी अधूरी पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई होगी पूरी

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किराये के भवन में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेज को तीन साल की लंबी जद्दोजहद के बाद खुद का भवन मिला लेकिन यहां भी अव्यवस्था का बोलबाला है। बदइंतजामी के बीच नए भवन में पठन-पाठन शुरू हुआ है। अधूरी तैयारियों के बीच कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई पूरी होगी। वहीं, कॉलेज में एक भी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी नहीं है। साथ ही विद्यार्थियों को हॉस्टल की सुविधा से भी वंचित रहना पड़ रहा है।
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वर्ष 2017 में शासन ने राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण की स्वीकृति दी थी। 48.50 करोड़ के बजट से 2022 से निर्माण कार्य शुरू हुआ। जुलाई 2025 में कार्यदायी संस्था ने इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन को एकेटीयू विश्वविद्यालय लखनऊ को हैंडओवर कर दिया।
15 अगस्त से कॉलेज में शैक्षिक गतिविधियां शुरू हो गईं। इसके पूर्व सत्र 2023-24, 2024-25 के 205 विद्यार्थियों का पठन-पाठन केएनआईटी सुल्तानपुर में संचालित किया गया।
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भारत रत्न बाबा साहब भीमराव आंबेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में अभी भी कई स्तरों पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। कॉलेज में शिक्षकों के आवास निर्माण का काम जारी है। वहीं, छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा अब तक नहीं मुहैया कराई गई है।
छात्राओं के लिए बन रहे हॉस्टल का निर्माण भी अधूरा है। जबकि 80 छात्राएं कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं। वहीं, केएनआईटी में उनके लिए हॉस्टल की सुविधा थी। छात्राओं को यहां पढ़ने के लिए बाहर किराये पर कमरा लेना पड़ रहा है। आवागमन के लिए बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। छात्राओं ने बताया कि कॉलेज वाले रास्ते पर स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगाई गई हैं।
कंप्यूटर साइंस की सीटें फुल, शिक्षक के पद खाली
कॉलेज में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग की 75-75 सीटें हैं। वर्तमान में कंप्यूटर साइंस की सभी सीटें फुल हैं लेकिन शिक्षक एक भी नहीं हैं। दूसरे विभाग में 40 फीसदी सीटें ही भर सकी हैं। जिसमें 15 शिक्षकों की नियुक्ति संविदा पर की गई है। मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल के छात्रों के लिए लैब भी नहीं है।

विद्यार्थी बोले
0 मुरादाबाद के हर्ष चौहान ने कंप्यूटर साइंस प्रथम सेमेस्टर में दाखिला लिया है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल न होने से 4,500 रुपये में किराये का कमरा लिया है। ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने से पैदल कॉलेज तक आना पड़ता है। कॉलेज परिसर में मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत है। कैंटीन की सुविधा भी नहीं है।
0 वाराणसी के सूर्यदेव भी महंगे किराये के कमरे में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में बिजली की व्यवस्था न होने से गर्मी में परेशानी होती है। कॉलेज तक पहुंचने के लिए सड़कें खराब हैं। कॉलेज में लाइब्रेरी की सुविधा नहीं है। पानी की पर्याप्त सुविधा नहीं दी गई है। साइकिल से कॉलेज तक आना पड़ता है। रास्ते में स्ट्रीट लाइट न होने से शाम को लौटते समय छात्राओं को डर लगता है।
बोले निदेशक
ट्रांसपोर्ट के लिए एक माह में बस सेवा शुरू की जाएगी। छात्राओं का हॉस्टल भी जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। बिजली व्यवस्था के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। फैकल्टी में नए शिक्षक और कर्मचारियों की तैनाती के लिए एकेटीयू विवि को पत्र लिखा गया है। कुल 355 विद्यार्थी कॉलेज में अध्ययनरत हैं। - प्रो. वाईएन सिंह, कॉलेज निदेशक
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