आजीवन कारावास के आरोप में निरुद्ध बुजुर्ग बंदी को दया याचिका के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। कारागार प्रशासन ने फूल माला पहनाकर सबसे बुजुर्ग बंदी की विदाई की। मानधाता थाना क्षेत्र के कुशफरा गांव में 20 जुलाई 1969 को हुई हत्या के मामले में अबू सहम सहित 11 लोगों को सत्र न्यायाधीश ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। 20 सितंबर 1970 को जारी आदेश के बाद से वह जेल में निरूद्ध हैं।
लंबी अवधि की सजा के कारण बंदी अबू सहम को केंद्रीय कारागार नैनी स्थानांतरित कर दिया गया था।
12 जनवरी 1984 को जमानत पर रिहा किया गया। 22 जुलाई 2022 को जनपद न्यायाधीश ने शेष सजा के लिए अबू सहम को दोबारा कारागार में निरूद्ध किया।
अधिक आयु और शारीरिक अस्वस्थता के चलते दिसंबर 2022 में बंदी की दया याचिका के जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से शासन को प्रेषित किया गया था। महानिरीक्षक कारागार के अनुरोध पर राज्यपाल ने 28 दिसंबर 2024 को अब सहम की दया याचिका को स्वीकार कर लिया।
जिला मजिस्ट्रेट ने 10 जनवरी 2025 को दया याचिका स्वीकार किए जाने पर रिहाई का आदेश जारी किया।
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