बेल्हा के एक और लाल ने सफलता की नई इबारत लिखी है। सदर विकास खंड के नरिया गांव निवासी राजकुमार त्रिपाठी को एमपी पीसीएसजे 2014 की परीक्षा में चौथी रैंक मिली है। उसकी सफलता से परिवार के साथ गांव के लोग भी खुशी से झूम रहे हैं। राजकुमार ने इसके लिए कभी कोचिंग से तैयारी नहीं की, बल्कि खुद तैयारी कर अपना मुकाम बनाया। दो भाइयों में बड़े राजकुमार के परिवार में कोई भी व्यक्ति नौकरीपेशा नहीं है। फिर भी उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना लक्ष्य हासिल किया।
सदर विकास खंड के नरिया गांव निवासी राजकुमार त्रिपाठी के पिता दीवानी न्यायालय में अधिवक्ता हैं। मंगलवार रात जब राजकुमार के मध्यप्रदेश पीसीएसजे 2014 की परीक्षा में चौथी रैंक प्राप्त करने की खबर मिली तो लोग गदगद हो गए। राजकुमार त्रिपाठी के परिवार में कोई भी व्यक्ति उच्च पद पर आसीन नहीं है। मगर उसने बचपन से ही मन में यह संकल्प ले लिया था कि उसे जज ही बनना है। शहर के केपी कॉलेज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक की डिग्री उसने इलाहाबाद विवि से प्राप्त की।
विधि स्नातक की पढ़ाई के लिए दिल्ली विवि में दाखिला लिया। एलएलएम करने के बाद राजकुमार दिल्ली विश्वविद्यालय से ही शोध कर रहे हैं। बुधवार को उसकी सफलता की जानकारी परिजनों को हुई तो वे झूम उठे। फोन पर बातचीत के दौरान राजकुमार त्रिपाठी ने बताया कि सकारात्मक सोच ही मंजिल तक पहुंचा सकती है। गुरुवार को घर आने की बात करते हुए कहा कि इस दौरान अनेक बार परीक्षा में शामिल हुए। असफलता मिलने के बाद भी उन्हें विश्वास था कि एक दिन वह अपने मिशन में जरूर कामयाब होंगे। परीक्षा की तैयारी में लगे युवाओं को सफलता का टिप्स देते हुए कहा कि अगर उन्हें असफलता मिलती है तो हतोत्साहित न हों, बल्कि अपनी कमियों को सुधारने का प्रयास कर सफलता पर ध्यान केंद्रित रखे।