नए शैक्षिक सत्र सुधारने को लेकर हाईस्कूल और इंटरकॉलेजों के प्रिंसिपल बेखबर हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सितंबर माह के अंत तक छमाही परीक्षा कराने का निर्देश दिया था, मगर जिले के अधिकांश कॉलेजों में इसकी पहल ही नहीं हुई है। अगर कॉलेजों के प्रिंसिपल इसी तरह मनमानी करते रहे, तो शिक्षासत्र सुधारना मुश्किल होगा।
यूपी बोर्ड ने सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के तर्ज पर जिले के हाईस्कूल और इंटरकॉलेजों में पठन-पाठन का समय निश्चित किया है। अन्य बोर्डों की तरह ही शैक्षिक सत्र को बदल कर एक अप्रैल से 31 मार्च कर दिया है। शिक्षासत्र को सुधारने के लिए बोर्ड ने पहली बार छमाही परीक्षा सितंबर और वार्षिक परीक्षा फरवरी के प्रथम सप्ताह में प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शिक्षासत्र का जो कार्यक्रम तय किया है, उसके मुताबिक 31 मार्च को सत्र का समापन कर छात्र-छात्राओं को अनिवार्य रूप से अंकपत्र वितरित कर देना है। एक अप्रैल से छात्र-छात्राओं को नई कक्षाओं में दाखिला दे दिया जाएगा।
शिक्षासत्र को सुधारने के लिए यूपी बोर्ड नेे जो कार्यक्रम जारी किया था, उसके मुताबिक सितंबर माह के अंत छमाही परीक्षा कराने के निर्देश दिए गए थे। कॉलेजों में अगर सितंबर माह के बाद छमाही परीक्षा होती है, तो छात्र-छात्राओं के शैक्षिक क्षमता का परीक्षण सही ढंग से नहीं हो पाएगा, और बच्चों में सुधार का मौका भी नहीं रहेगा। इधर डीआईओएस शिवकुमार ओझा ने कहा है कि बोर्ड से जारी शिक्षासत्र कार्यक्रम सभी प्रिंसिपलों को भेजा जा चुका है। अगर वह समय से छमाही परीक्षा नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।