जिले के लोगों के लिए इन दिनों ई-स्टांपिंग प्रणाली मुसीबत बन गई है। मैनुअल स्टांप मिल नहीं रहा है और ऑनलाइन स्टांप लेने में चार गुना से अधिक रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। खासकर छोटे स्टांप की अधिक मांग होने से ग्राहकों के लिए समस्या बनी हुई है।
शासन ने स्टांप की जालसाजी रोकने और आम जनता के हित में ई-स्टांपिंग प्रणाली लागू की है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ई-स्टांपिंग प्रणाली लागू होने के बाद स्टांप वेंडरों ने कचहरी में कंप्यूटर लगवाया। दस रुपये के एक स्टांप को निकालने में स्टांप वेंडरों का तकरीबन 25 रुपये खर्च आ रहा है। इसे वह ग्राहक को 50 रुपये में बेच रहे हैं।
इधर, मैनुअल स्टांप की कमी होने से लोग मजबूर होकर ई-स्टांप ले रहे हैं। मैनुअल स्टांप जिन लोगों के पास हैं भी वह 50 से 100 रुपये में बेच रहे हैं। छोटे स्टांप खरीदना ग्राहकों के लिए भारी पड़ रहा है। हालांकि बड़ी राशि वाले स्टांप मैनुअल भी बाजार में उपलब्ध हैं। दअसल, दस, 20, 50 और 100 रुपये के स्टांप बैंक और शपथपत्रों में अधिक इस्तेमाल होते हैं। इसीलिए इनकी मांग अधिक होती है।
कोषागार में छह माह पहले खत्म हो गए थे स्टांप
कोषागार में दस से 100 रुपये तक के स्टांप छह माह पहले ही खत्म हो गए थे। शासन ने नए स्टांप की छपाई पर रोक लगाने के साथ ही स्टांप वेंडरों से ऑनलाइन स्टांप डाउनलोड करने को कहा था, मगर ई-स्टांप वेंडरों के साथ ही ग्राहकों को भी भारी पड़ रहा है।
ऑनलाइन स्टांप में खर्च थोड़ा अधिक आ रहा है। इसी वजह से लोगों को अधिक रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। फिलहाल जल्द ही इस समस्या से निजात मिलने की संभावना है।
अविनाश पांडेय, एआईजी, स्टांप