फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्रांजिट परमिट न दिखाने पर चालक को पीटा, व्यापारियों ने डीएफओ कार्यालय में किया हंगामा

विज्ञापन
चिलबिला पट्टी रोड़ पर वन विभाग द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न के विरोध में महुली मंडी के सामने जाम ल? - फोटो : PRATAPGARH
विज्ञापन
ट्रांजिट परमिट न दिखाने पर चालक को वन विभाग के कर्मचारियों ने पीट दिया। आरोप है कि उससे रुपये और मोबाइल छीन लिए। जानकारी पर पहुंचे व्यापारी वन विभाग के कार्यालय पहुंचकर हंगामा करने लगे। बवाल की आशंका को देखते हुए पुलिस पहुंच गई। लिखापढ़ी के बाद वन विभाग ने ट्रक चालक का चालान कर दिया। घटना से नाराज आंवला कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि टीपी के नाम पर वन विभाग शोषण बंद नहीं करता तो वे लोग मंडी में तालाबंदी करेंगे।
विज्ञापन

भले ही किसान आंवला अपने खेत में पैदा करें, लेकिन वन विभाग इसे वन उपज मानते हुए ट्रांजिट परमिट की रसीद बनवाता है। 76 रुपये प्रति टन के हिसाब से वन विभाग कार्यालय में टीपी की रसीद काटी जाती है। आंवला कारोबारियों का आरोप है कि मंगलवार की रात वन विभाग की टीम आढ़ती विनोद के आंवला लदे ट्रक को टीपी न दिखाने पर पकड़कर चिलबिला कार्यालय ले गई।
जहां चालक फूलचंद्र के साथ मारपीट की। आरोप है कि विनोद के जेब से 15 हजार रुपये व मोबाइल वन विभाग के कर्मचारियों ने छीन लिया। इसकी जानकारी होने पर रात में ही बड़ी संख्या में आढ़ती व कारोबारी वन विभाग के कार्यालय पहुंचकर हंगामा करने लगे। उस समय महुली मंडी में करीब आंवला लदे 50 ट्रक खड़े थे। बवाल की आशंका को देखते हुए वन विभाग के कर्मचारियों ने पुलिस बुला ली। मौके पर पहुंचे शहर कोतवाल को कारोबारियों ने वन विभाग द्वारा टीपी के नाम पर की जा रही धनउगाही की शिकायत भी की।
विज्ञापन

आंवला कारोबारी धरना देने के लिए कार्यालय परिसर में बैठ गए। हालांकि पुलिस के समझाने पर लोग लौटे और वाहनों को भेजा। बुधवार को वन विभाग ने लिखापढ़ी करने के बाद चालक फूलचंद्र का चालान कर दिया। आंवला कारोबारी अब्दुल रहमान नान्हू ने वन विभाग को चेतावनी दी कि टीपी के नाम पर वन विभाग वसूली बंद नहीं करता तो सभी मिलकर मंडी में तालाबंदी करेंगे। जिससे होने वाले नुकसान के लिए वन विभाग जिम्मेदार होगा।
बढ़ गया है वन विभाग का रेट
आंवला कारोबारी वन विभाग की मनमानी से बेहद नाराज हैं। लोगों का कहना है कि आंवला वन उपज नहीं है बल्कि, उसे खेतों में तैयार किया जाता है। पहले वन विभाग की टीम आंवला लदे वाहनों को परमिट देने के लिए मंडी में मौजूद रहते थे।
अब वन विभाग के कार्यालय जाकर परमिट बनवाना पड़ता है। आंवला कारोबार अब्दुल रहमान उर्फ नान्हू भाई का कहना है कि पहले एक हजार रुपये अवैध वसूली वन विभाग लेता था। अब पांच हजार दाम हो गया है। डिमांड पूरी करने कदे बाद ही परमिट जारी किया जाता है।
जमीन विवाद में बोला धावा, सहमे रहे परिजन
संडवा चंडिका। जमीन विवाद में पड़ोसियों ने धावा बोलकर हंगामा किया। जिससे परिवार के लोग सहमे रहे। अंतू थाना क्षेत्र के पीठीपट्टी निवासी सूरज का गांव के ही अनिल से विवाद चला आ रहा है। सूरज की पत्नी आशा ने अनिल पर आरोप लगाया है कि मंगलवार को उसके पति बाहर गए थे। रंजिश के चलते अनिल ने साथियों के साथ उसके घर पर धावा बोल दिया। आसपास के लोगों के पहुंचने पर हमलावर भाग निकले। पीड़िता ने मामले की सूचना पुलिस को दी है।

चिलबिला वन विभाग कार्यालय में उत्पीड़न के विरोध में हंगामा कर रहे आंवला व्यापारियों को समझाती प?- फोटो : PRATAPGARH

चिलबिला वन विभाग कार्यालय में उत्पीड़न के विरोध में धरने पर बैठे आंवला व्यापारी।- फोटो : PRATAPGARH

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें