जिले की बीमार हो चली चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की कवायद स्वास्थ्य महकमे ने शुरू कर दी है। ग्रामीण इलाके में खासकर महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए सीएचसी और पीएचसी में तैनात लेडी डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ को चिकित्सा जगत की नई-नई जानकारियों से अवगत कराने उनको प्रशिक्षित किया जाएगा। जिला महिला अस्पताल में एक मई से इसका प्रशिक्षण शुरू होगा। जो साल भर चलेगा।
ग्रामीण इलाके में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद खराब है। इसकी वजह संसाधनों और स्टाफ का अभाव माना जा रहा है। विशेषकर महिलाओं की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग और उसके जिम्मेदार जागरूक नहीं हैं। नसबंदी से लेकर डिलीवरी तक में जो भी समस्याएं आती हैं, उनका हल सीएचसी और पीएचसी स्तर पर होना चाहिए जो नहीं हो रहा है। जिम्मेदारी से बचने के लिए अस्पताल का स्टाफ ऐसे मामलों को हैंडिल करने के बजाए उनको सीधा जिला महिला अस्पताल रेफर कर देता है। अस्पताल पहुंचने पर उस मरीज का ट्रीटमेंट उस स्तर पर नहीं हो पाता है जिसकी जरूरत होती है। दोनों जगह की लापरवाही के चलते मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। जिले में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। जिसमें मरीज की मौत हो गई है। जब भी इस तरह के मामले आए, डाक्टर और स्टाफ सुविधा और जानकारी का अभाव बताकर बच निकलते हैं।
इस समस्या से निबटने के लिए जिले की सीएचसी और पीएचसी पर तैनात लेडी डॉक्टर और स्टाफ नर्स को इसके लिए प्र्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण एक मई से जिला महिला अस्पताल के ट्रेनिंग हाल में शुरू होगा। ट्रेनिंग में जिलेभर की लेडी डॉक्टर और नर्स भाग लेंगी। ट्रेनिंग कई चरणों में होगी। एक बैच 12 लोगों का होगा। सूत्रों के अनुसार प्रशिक्षण साल भर चलेगा। प्रशिक्षण में चिकित्सा जगत से जुड़ी आपरेशन और सेवा संबंधी नई जानकारी दी जाएगी।