आवास का बहाना बनाकर अस्पताल से भागने वाले चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग झटका देने की तैयारी में है। जिला अस्पताल की जर्जर कॉलोनी को तोड़वाकर अब वहीं नई कालोनी बनवाई जाएगी। डाक्टरों को कालोनी में ही निवास करना अनिवार्य किया जाएगा। ऐसे में उन्हें इमरजेंसी के वक्त तत्काल अस्पताल बुलाया जा सकेगा।
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक आवास न होने का बहाना बनाकर ओपीडी करने के बाद घर चले जाते हैं। इमरजेंसी में चिकित्सकों की आवश्यक्ता पड़ती है तो रात में वे खोजे नहीं मिलते हैं। कुछ ऐसे भी चिकित्सक हैं जो आवास के लिए काफी दिनों से भटक रहे हैं।
नए सीएमएस महेन्द्र विक्रम सिंह ने जिला अस्पताल परिसर में बने चिकित्सकों के आवास का निरीक्षण करने के बाद पाया कि कई आवास टूटे हैं तो कुछ चिकित्सक टीनशेड में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सीएमएस ने जर्जर और टीनशेड के बने सरकारी आवासों को तोड़वाकर उसी स्थल पर तीन दो से तीन मंजिला आवास बनवाने के लिए शासन को पत्र भेजा है।
आवास बनने के बाद ओपीडी करके घर भागने वाले चिकित्सक अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। उनका आवास के लिए बहाना नहीं चलेगा। आवश्यक्ता पड़ने पर इमरजेंसी से चिकित्सकों के पास कॉल भेजा जाएगा और रात में भी वे मरीज को देखने के लिए अस्पताल में उपस्थित मिलेंगे। सीएमएस ने इसी के साथ काफी दिनों से जर्जर पड़े स्टाफ नर्स हॉस्टल की मरम्मत के लिए भी शासन से बजट की मांग की है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक महेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि चिकित्सक ठहरने के लिए आवास न होने के चलते घर चले जाते थे।
पुराने आवास को तोड़वाकर उसी पर दो तल का नया आवास बनवाया जाएगा। इससे चिकित्सकों को भी आवास मिल जायेगा। इसके बाद उन्हें आवास में रुकना अनिवार्य कर दिया जाएगा। उनके पास कोई बहाना नहीं बचेगा तो मरीजों का इलाज भी समय से होगा। शासन को पत्र भेजा गया है।