कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए सरकार तमाम जतन कर रही है। जागरूकता कार्यक्रमों के साथ उनके लिए पौष्टिक आहार भी शासन की तरफ से दिया जा रहा है, लेकिन जिला अस्पताल के कुपोषण सेंटर में बच्चों के इलाज के लिए डाक्टर ही नहीं हैं। सेंटर में तैनात डाक्टर को जिला अस्पताल में अटैच कर दिया गया है। ऐसे में दो नर्स व एक यूटीशियन कुपोषित बच्चों का इलाज कर रही हैं।
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही है। जागरुकता कार्यक्रमों के साथ कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के लिए आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिस क्षेत्र में कुपोषित बच्चे मिलते हैं, आंगनवाड़ी कार्यकत्री व आशा बहू उन्हें जिला अस्पताल में बने कुपोषण पुनर्वास के न्द्र में भर्ती करवाती हैं। भर्ती बच्चों को समय-समय पर आहार दिए जाने का आदेश है। उनकी मां को दोनों मीटिंग खाना व रोजाना 50 रुपये प्रोत्साहन राशि सरकार दे रही है। कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए कुपोषण पुर्नवास केन्द्र में डॉक्टर कंचनलता की तैनाती की गई थी। पूर्व सीएमओ वीके पांडेय ने कंचन लता को एनसीटी केन्द्र में तैनाती दे दी। दो माह से कुपोषण पुर्नवास केन्द्र डॉक्टर विहीन है। तीन स्टाफ नर्स थीं जो बच्चों की देखरेख कर रही थीं। इन दिनों एक स्टाफ नर्स 6 माह की छुट्टी पर चली गई है। इलाज न हो पाने के कारण कुपोषित बच्चों को उनके परिजन कुपोषण पुर्नवास केन्द्र लाना पंसद नहीं कर रहे हैं।