प्रतापगढ़ में सेफ्टी को ताक पर रखकर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। शनिवार की रात पीएल पैसेंजर का इंजन जीआरपी थाने के सामने डायमंड रेलवे क्रासिंग पर पटरी से उतर गया। जिससे प्लेटफार्म एक पर सात घंटे तक आवागमन ठप रहा। कई गाड़ियां लेट हुईं। इलाहाबाद से रिलीफ ट्रेन आने के बाद ही इंजन पटरी पर आ पाया। जांच में पाया गया बिना प्वांइट बनाये ही इंजन चलवा दिया गया था जिससे वह दो पटरियों के बीच जाकर उतर गया। जांच में प्रथम दृष्टया सिग्नल विभाग को दोषी माना जा रहा है।
रेलवे कर्मचारियों के अनुसार प्रतापगढ़ से लखनऊ जाने वाली पीएल पैसेंजर का इंजन यार्ड में खड़े दूसरे इंजन को खींचकर ला रहा था। इस इंजन को पीएल के साथ जोड़कर लखनऊ भेजना था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों इंजन जीआरपी के सामने डायमंड रेलवे क्रासिंग के पास पहुंचे। उसी वक्त पीएल के इंजन के अगले सभी चक्के एक के बाद एक पटरी से नीचे उतरते चले गए। शंटर मुन्ना कुमार कुछ समझ पाता तब तक पूरा इंजन पटरी से उतर चुका था। उसका कुछ हिस्सा पटरियों के बीच में जाकर धंस गया था। इसकी जानकारी होने पर हड़कंप मच गया। शंटिंग करा रहे शंटर हारून और अशर्फीलाल ने सूचना एसएम शमीम अहमद को दी। स्थानीय अधिकारी से लेकर कर्मचारी जो सुना स्टेशन भागने लगा। सुबह होते ही लखनऊ से आए अधिकारी और कर्मचारी वहां जमा हो गए। बाद में इलाहाबाद से रिलीफ ट्रेन मंगाई गई। करीब सुबह दस बजे के बाद इंजन को पटरी पर लाया जा सका।
हादसे के कारण एक नंबर प्लेटफार्म की सभी गाड़ियों को दो से चलाया गया। इससे कई गाड़ियां लेट हुईं। पीएल करीब 11 बजे पांच घंटे की देरी से दूसरे इंजन के साथ रवाना हुई। जांच कर रही टीम के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच में सिग्नल विभाग प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। बिना प्वाइंट बने ही इंजन को चलाने का निर्देश दे दिया गया। दूसरी ओर सिग्नल विभाग के अधिकारी इस आरोप को सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि परिचालन विभाग के लोग लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं। बता दें कि पांच साल में इस तरह के चार डिरेलमेंट प्रतापगढ़ यार्ड में हो चुके हैं। उसके बाद भी जिम्मेदार लोगों ने दुर्घटनाओं से सबक नहीं लिया है। इस बारे में एसएस केएन शर्मा का कहना है कि घटना का दोषी कौन है फिलहाल अभी यह कहना जरा मुश्किल है। उधर, खंड अभियंता सिग्नल पूर्णेंदू ने डिरेलमेंट के लिए परिचालन विभाग को जिम्मेदार बताया।