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विभाग फेल, क्रय केंद्रों में भीग रहा गेहूं

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किसानों का गेहूं खरीदने में तेजी दिखाने वाले खाद्य और विपणन विभाग उसे सुरक्षित रखवाने में फेल हो गए हैं। दो दिनों से बारिश होने के कारण क्रय केंद्रों पर रखा गेहूं भीग रहा है।
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खरीद केंद्रों पर डंप गेहूं के बोरों पर पॉलीथिन लगाई गई थी, मगर तूफान के साथ हुई बरसात से अधिकांश गेहूं भीग गया। इस इस वर्ष 36,000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है, जो पिछले वर्ष से दोगुना है।
किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने का आज अंतिम दिन था। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में 50 खरीद केंद्र स्थापित कर एक अप्रैल से गेहूं की खरीद की जा रही है। ढाई माह तक हुई गेहूं की खरीद में 11,236 किसानों ने 36,000 मीट्रिक टन गेहूं बेचा है।
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1950 रुपये की दर से होने वाली गेहूं खरीद में इन किसानों को 69.23 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। पिछले वर्ष 17,000 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हुई थी। इस वर्ष विभागीय अधिकारियों की तेजी के चलते दूने से अधिक गेहूं की खरीद हुई है।
जिले के किसानों से गेहूं खरीदने में विभागीय अफसरों ने तेजी तो खूब दिखाई, मगर किसानों से खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित रखने में फेल हो गए। आलम यह रहा कि गेहूं खरीद बंद होने के बाद भी गेहूं केंद्रों पर डंप है।
जबकि गेहूं के इन बोरों को भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में होना चाहिए। दो दिन से जिले में रुक-रुक कर बरसात हो रही है। गेहूं के बोरे पॉलीथिन से ढके हुए हैं, मगर जब हवाओं के साथ बरसात होती है, तो पॉलीथिन फट जाती है या फिर उड़ जाती है। इससे गेहूं के बोरे भीग जाते हैं।
वर्जन-----------
जिले में इस वर्ष 36,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने में सफलता मिली है, जबकि पिछले वर्ष 17,000 हजार मीट्रिक टन खरीद हुई थी। खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले अधिकांश किसानों का भुगतान कर दिया गया है। हाल में बेचने वाले किसानों को सप्ताह भर के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा।
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अजीत कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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