नोटबंदी के विरोध में विपक्षियों के भारतबंद का आह्वान बेल्हा में पूरी तरह बेअसर रहा। सामान्य दिनों की भांति सुबह शहर और ग्रामीण इलाकों की दुकानें खुली और ग्राहकों ने खरीदारी की। कांग्रेस पार्टी जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन तक ही सीमित रही। आलम यह रहा कि व्यापारी नेता और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने भारतबंद में तटस्थता की भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटबंदी के खिलाफ सोमवार को संपूर्ण विपक्ष ने भारतबंद का आह्वान किया था। मगर, बेल्हा में इसका कोई असर नहीं दिखा। सुबह दुकान खोलने को लेकर व्यापारी असमंजस की स्थिति में थे, मगर ग्यारह बजते ही स्थिति सामान्य देखकर पंजाबी मार्केट, चौक, भंगवाचुंगी, पल्टनबाजार, बलीपुर और कचहरी रोड की दुकानें खुलनी प्रारंभ हो गई। हालांकि दुकानों को बंद कराने के लिए किसी भी पार्टी ने पहल भी नहीं की। नोटबंदी का सबसे अधिक विरोध कर रही बसपा और सपा के कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखा। इससे दिन भर बाजारों में पूर्व दिनों की भांति ग्राहक खरीदारी करते रहे।
विरोध में उतरी कांग्रेस अकेले ही शोर मचाती रही, मगर जब उसका कोई असर नहीं दिखा तो वह भी सिर्फ फर्ज अदायगी तक सिमट कर रह गए। हालांकि सोमवार को प्रदर्शन के पूर्व कांग्रेस ने विरोधियों को एकजुट करने का प्रयास किया। व्यापारी नेताओं सहित क्षेत्रीय दलों का भी सहयोग मांगा, मगर उसे समर्थन नहीं मिला। हालांकि कांग्रेस ने दावा किया कि वह भारत बंद के पक्ष में नहीं थी, बल्कि वह जनाक्रोश के रूप में जनता की भावनाओं को व्यक्त कर रही थी।े