बदहाल दीवारें और टूटी-फूटी फर्श अब राजकीय विद्यालयों की पहचान नहीं रहेगी। जल्द ही राजकीय विद्यालयों के दिन बहुरने वाले हैं। राजकीय विद्यालयों के सुंदरीकरण की तैयारी है। टूटी-फूटी फर्श और बदहाल दीवारों को दुरुस्त कर चमका जाएगा। जंग खा रहीं खिड़कियों एवं दरवाजों को भी बदला जाएगा। विभाग ने सभी प्रधानाचार्यों से विद्यालयों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।
जिले में 41 राजकीय विद्यालय हैं। वर्तमान समय में अधिकांश राजकीय विद्यालयों की हालत खस्ता हैै। देखरेख के अभाव में राजकीय विद्यालयों की दशा खराब हो चुकी है। अधिकांश विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। फर्श टूट चुकी है। खिड़कियां और दरवाजे जंग खा चुके हैं। विद्यालयों में बैठने के लिए भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। क्लास शुरू होने पर बच्चों को काफी दिक्कत होती है। यही वजह है कि धीरे-धीरे राजकीय विद्यालयों का क्रेज घटता जा रहा है।
इसे देखते हुए एक बार फिर राजकीय विद्यालयों को संवारने की तैयारी है। बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी व मेज आदि की व्यवस्था की जाएगी। विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को पुख्ता कर शिक्षा का माहौल तैयार करने के लिए विभाग ने रूपरेखा तैयार की है।
इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने राजकीय विद्यालयों से विद्यालय की मौजूदा स्थिति की हालत पर रिपोर्ट मांगी है। डीआईओएस डॉ. सर्वदानंद ने बताया कि विद्यालयों से इस संबंध में सूचनाएं मांगी गई हैं। जहां भी दिक्कत होगी, उसे दुरुस्त किया जाएगा। सूचनाएं मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
50 नए शिक्षक भी मिले
राजकीय विद्यालयों को पिछली भर्ती में 50 नए शिक्षक मिले हैं। हालांकि राजकीय विद्यालयों में 300 के करीब शिक्षकों की कमी है, लेकिन नए शिक्षकों के आने से निश्चित ही शिक्षण व्यवस्था में सुधार आएगा। राजकीय विद्यालयों के लिए चल रही शिक्षकों की भर्ती के बाद अभी और शिक्षक मिलने की उम्मीद है।