जिले के अफसरों ने कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने से बचने के लिए पचास वर्ष की उम्र पूरी करने वाले अक्षम कर्मचारियों को चिह्नित करने से मुंह फेर लिया है। यही वजह है कि अक्षम कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी गई है। आश्चर्य की बात तो यह है कि राजस्व विभाग और कलेक्ट्रेट को छोड़कर किसी भी विभाग के अफसरों ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति की रिपोर्ट नहीं भेजी है।
योगी सरकार ने पचास वर्ष की उम्र पूरी करने वाले ऐसे क्लास टू के अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए चिह्नित करने के लिए कहा था, जो कार्य करने में अक्षम हैं या जिनके खिलाफ कोई जांच चल रही है। जिले के विभागाध्यक्षों के पास शासन का यह आदेश लगभग एक माह पूर्व आया था। मगर विभागीय अधिकारियों ने मातहतों को बचाने के लिए सभी को क्लीन चिट दे दी। जिला विकास कार्यालय, जिला पंचायत राज अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग, कृषि विभाग में ऐसे कई कर्मचारी सिक्का जमाकर बैठे हुए हैं। जो कार्य करने में अक्षम हैं और जिनके खिलाफ अनियमितता का कई बार आरोप लग चुका है। डीपीआरओ और डीडीओ कार्यालय में कई ग्राम पंचायत अधिकारी/ ग्राम विकास अधिकारी ऐेसे हैं, जिनके खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज हो चुका है, मगर ऐसे कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी गई है। अफसरों का मानना है कि कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने पर वह कोर्ट में अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दायर करेंगे, ऐसे में जवाब देने के लिए उन्हें ही भागदौड़ करनी पड़ेगी। इससे बचने के लिए वह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। राजस्व विभाग में 03, और कलेक्ट्रेट में 06 ऐसेे कर्मचारी चिह्नित किए गए हैं, जिनका नाम अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए शासन को भेजा गया है।जिले में रह चुके तीन पूर्व बीएसए का नाम अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सूची में शामिल है। कमलाकर पांडेय, अशोक तिवारी, एसटी हुसैन के खिलाफ जांच लंबित होने के कारण इन अधिकारियों का नाम शिक्षा निदेशालय भेजा गया है।
50 साल के ऊपर अक्षम और अनियमितता के दायरे में आने वाले कर्मचारियों और अफसरों को चिह्नित करने के लिए 15 सितंबर अंतिम तिथि थी। शुक्रवार को यह तिथि बीतने के बाद इस दायरे में आने वाले कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।